नई दिल्ली. केंद्र सरकार हो या फिर अलग-अलग राज्यों की सरकारें, सभी पशुपालन को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं. ताकि किसानों की आमदनी को दोगुना कर सकें. इसलिए पशुपालन करने के प्रति प्रेरित करने काम भी सरकार द्वारा किया जा रहा है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की सरकार भी पशुपालकों समेत अन्य लोगों के बीच एक जारुकता का अभियान चलाने की तैयारी में है. ताकि ज्यादा से ज्याद पशुपालकों को पशुपालन के फायदे बताए जा सकें. जिससे वो पशुपालन के काम में आगे आएं और खुद को फायदा पहुंचाने के साथ-साथ दूध उत्पादन भी बढ़ाएं.
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की मोहन यादव वाली सरकार राज्य में हो रहे 9 फीसद दूध उत्पादन को बढ़ा 20 फीसद करना चाहती है. इसलिए डेयरी सेक्टर में कई काम किए जा रहे हैं. सरकार कई योजनाओं को लेकर भी आई है. ताकि पशुपालन करने की चाहत रखने वाले किसानों को बजट का कोई मसला न आए और वो पशुपालन करके अपनी इनकम बढ़ाने के साथ ही राज्य में दूध उत्पादन को भी बढ़ाने में सरकार की मदद करें.
क्या है सरकार का प्लान
वहीं मध्य प्रदेश में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा पशुपालकों, किसानों, छात्र-छात्राओं को पशुपालन एवं डेयरी से संबंधित योजनाओं के बारे में जागरुक किया जा रहा है.
वहीं इसके अलावा सरकार ने पशु कल्याण के बारे में जागरूक करने के लिए पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरूकता माह का आयोजन किया. जो 13 फरवरी तक चलेगा.
केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार प्रदेश में भी पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरूकता माह का आयोजन किया गया है.
इस कार्यक्रम को लेकर संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पीएस पटेल ने सभी जिलों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं.
संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि यह अभियान राज्य, जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर कई गतिविधियों के माध्यम से संचालित होगा.
अभियान में पशुकल्याण, पशु चिकित्सा सेवाओं, पशुपालन, डेयरी, बकरी एवं मुर्गी पालन से संबंधित योजनाओं के साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा पशुपालन से संबंधित चलाई जा रही योजनाओं के बारे में पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा.
एमपी में पशुपालन की कौन-कौन सही योजनाएं चल रही हैं
गौरतलब है कि सरकार की तरफ से पशुपालन में बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. वहीं दुधारू पशुओं की गाय भैंस की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है. जबकि डेयरी पशुओं की नस्ल सुधार का भी काम किया जा रहा है. छोटे किसानों के लिए डेयरी इकाई स्थापना में भी सरकार आर्थिक मदद दे रही है.












