नई दिल्ली. पशुपालन में कई बातों का ध्यान देना होता है. जैसे कई राज्य ऐसे हैं, जहां मॉनसून में बाढ़ का खतरा रहता है. बिहार राज्य भी उन्हीं में से एक है. यही वजह है कि बिहार सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुपालन करने वाले पशुपालकों के लिए कुछ गाइडलाइंस जारी की गई हैं. जिसमें छह प्वाइंट पर फोकस करने के लिए कहा गया है ताकि पशुधन को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न आए. इसमें स्वास्थ्य की निगरानी, पशु ट्रांसफर, पोषण और मानसिक राहत, आहार प्रबंधन, स्वच्छ पानी की व्यवस्था और सफाई और संक्रमण नियंत्रण पर चर्चा की गई है.
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fisheries Resources) अगर आप भी इन प्वाइंट्स पर ध्यान देना चाहते हैं तो फिर पशुपालन में नुकसान का खतरा बिल्कुल कम हो जाएगा.
स्वास्थ्य की निगरानी
पशुओं को बार-बार जांचें कि कहीं उन्हें चोट, बुखार, या दस्त तो नहीं हो रहा.
बीमार पशु को अलग रखें और तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें.
पशु ट्रांसफर
पशुओं को जल्द से जल्द ऊँचाई वाले सुरक्षित स्थल पर पहुंचाएं.
अगर नाव या ट्रॉली का उपयोग करना पड़े, तो धैर्यपूर्वक करें और एक बार में ज़्यादा पशु न चढ़ाएं.
पोषण और मानसिक राहत
बाढ़ के तनाव के बाद पशुओं को खनिज मिश्रण, गुड़, नमक आदि दें ताकि वे फिर से स्वस्थ हो सकें.
उन्हें पर्याप्त आराम और धूप मिले यह सुनिश्चित करें.
आहार प्रबंधन
सूखा चारा जैसे भूसा, खली आदि बाँधकर सुरक्षित रखें.
गीला या सड़ा हुआ चारा न दें, इससे अपच या विषाक्तता हो सकती है.
स्वच्छ पानी की व्यवस्था
उबालकर ठंडा किया हुआ या क्लोरीन मिलाया पानी पिलाएं.
गंदे पानी से कई रोग फैल सकते हैं (जैसे लिवर फ्लूक, डायरिया आदि).
सफाई और संक्रमण नियंत्रण
पशुशाला की सफाई करें, कीचड़ हटाएं, चूना या फिनाइल डालें.
पशुओं को नहलाएं, उनके शरीर से जोंक या कीट हटाएं.
खुरों की सफाई करें और उनमें पोटैशियम परमैंगनेट मिलाया पानी डालें.












