नई दिल्ली. अप्रैल का महीना शुरू चुका है. इसके साथ ही गर्मी का भी आगाज हो गया है. गर्मी न सिर्फ आम इंसानों बल्कि पशुओं को भी परेशान करती है. जिस हम आम इंसान गर्मी की वजह से अपनी एनर्जी में कमी महसूस करते हैं, ठीक उसी तरह से पशुओं की भी एनर्जी कम होती है. इंसानों की तरह पशुओं को भी पसीना होता है. कुल मिलाकर कहा जाए तो जिस तरह आम इंसान अपना खुद ख्याल रख लेते हैं और गर्मी से खुद को बचा लेते हैं, ठीक उसी तरह से पशुओं का भी ध्यान रखने की जरूरत होती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि इंसान अपनी परेशानी कह सकते हैं लेकिन पशु नहीं, इसलिए उन्हें पालने वाले पशुपालकों को खुद ही पशुओं की परेशानी को समझना पड़ता है. एनिमल एक्सपर्ट बताते हैं कि अप्रैल के महीने से ही पशुओं के रहन सहन में कुछ बदलाव करना चाहिए और उनका पिछले महीने के मुकाबले अलग तरीके से ध्यान रखना चाहिए. नहीं तो इसका असर उनकी सेहत पर पड़ेगा और इससे उत्पादन भी प्रभावित होगा.
अप्रैल माह में पशुपालकों को क्या सलाह देते हैं एक्सपर्ट
इस मौसम में पशुओं में लवण विशेषकर फॉस्फोरस की कमी के कारण ‘पाइका के लक्षण नजर आने लगते हैं.
इसलिए पशु मूत्र, मिट्टी आदि पीने या फिर चाटने लगते हैं. ऐसे में पशुओं को खनिज लवण मिश्रण अवश्य दें. जिससे ये दिक्कत नहीं आएगी.
इसी महीने में पशुओं को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज, विटामिन सभी संतुलित मात्रा में उपलब्ध कराने के लिए एजोला घास जरूर खिलाएं.
हरा चारा के लिए बोई गई मक्का, बाजरा एवं ज्वार की कटाई 45-50 दिन में जरूर से कर लें.
पशुओं को दिन में कम से कम चार बार पानी पिलाने का प्रयास करें. थनैला रोग की पहचान और निदान के उपाय करें.
गाभिन पशुओं को अतिरिक्त आहार दें और ब्याने वाले पशुओं को प्रसूति बुखार से बचाने के लिए 50-60 ग्राम खनिज मिश्रण नियमित रूप से दें.
पशुओं को बाहरी परजीवी से बचाने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से दवा का छिड़काव नियमित रूप से करें.
इस माह में अधिक गर्मी के कारण पशुओं में जल व लवण की कमी, भूख का कम होना एवं दुग्ध उत्पादन कम हो सकता है.
अतः तापमान के प्रभाव से पशुओं को बचाने का प्रयास करें. जिससे उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा.
निष्कर्ष
दोपहर में पशुओं को छाया वाले हवादार स्थान में रखें. यदि आप ये तमाम काम करते हैं तो पशुओं को गर्मी से होने वाली परेशानी से बचा पाएंगे. वहीं इससे पशुपालन के काम में आपको नुकसान भी नहीं होगा.












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