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Dairy Animal: पशुओं में खुर की समस्या दूर करने को भारत और डेनमार्क के एक्सपर्ट एक मंच पर आए

भारत और डेनमार्क की टीम.

नई दिल्ली. भारत में डेयरी पशुओं में खुरपका की समस्या बहुत बड़ी है. अक्सर पशुओं को ये परेशानी होती है. जिससे पशुओं की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इतना नहीं पशुओं का उत्पादन भी प्रभावित होता है. पशुओं को कई तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ जाता है. इससे डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में नुकसान होता है. हालांकि भारत में इस समस्या से पार पाने के लिए मुफ्त वैक्सीन भी लगाई जाती है और इसका फायदा भी मिला है. वहीं अब इसी कउ़ी में भारत और डेनमार्क के एक्सपर्ट एक मंच पर आए और इस समस्या के निदान पर बात की.

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने केरल पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (KVASU) के सहयोग से और रॉयल डेनिश दूतावास तथा डेनिश पशु चिकित्सा, खाद्य, कृषि और मत्स्य पालन एजेंसी (DVFAFA) के समर्थन से, केरल के त्रिशूर स्थित मन्नुथी में दो-दिवसीय ‘खुर प्रबंधन कार्यशाला’ का आयोजन किया. इस पहल ने भारत और डेनमार्क के अग्रणी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, वैज्ञानिक खुर स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण का कार्य किया, जो कि दुधारू पशुओं के कल्याण और उनकी उत्पादकता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है.

भारत-डेनमार्क बने साझेदार
एनडीडीबी के महा प्रबंधक (पशु स्वास्थ्य) डॉ. ए.वी. हरिकुमार ने कार्यशाला की पृष्ठभूमि को पेश किया.

उन्होंने पूरे भारत के डेयरी सहकारी तंत्र में एक सुव्यवस्थित खुर स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को संस्थागत रूप देने के प्रति NDDB के दृष्टिकोण को रेखांकित किया.

साथ ही उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने में भारत-डेनमार्क साझेदारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला.

यह पहल, भारतीय सहकारी डेयरी तंत्र में सतत डेयरी पद्धतियों को बढ़ावा देने और पशु स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में NDDB के निरंतर प्रयासों का ही एक हिस्सा है.

लंगड़ापन-जो मुख्य रूप से खुर संबंधी विकारों के कारण उत्पन्न होता है—डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.

इसके चलते पशुओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, उन्हें समय से पहले ही झुंड से अलग (culling) करना पड़ता है, और उनके कल्याण से जुड़े मानकों से समझौता करना पड़ता है.

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उत्पादकता में वृद्धि करना, होने वाले नुकसान को कम करना, तथा ‘वन हेल्थ’ (One Health) सिद्धांतों के अनुरूप नैतिक एवं सतत डेयरी पद्धतियों को बढ़ावा देना है.

Written by
Livestock Animal News Team

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