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Animal News: राज्यपाल ने पशु चिकित्सकों को याद दिलाई उनकी जिम्मेदारी, पशुपालन में बताई अहमियत

कार्यक्रम में मौजूद राज्यपाल व अन्य.

नई दिल्ली. पीवी नरसिंह राव तेलंगाना पशुपालन विश्वविद्यालय, हैदराबाद के 5वें वार्षिकोत्सव (Convocations) के दौरान राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने विश्वविद्यालय के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट छात्रों को संबोधित किया. इस दौरान राज्यपाल ने छात्रों को बधाई दी और याद दिलाया कि पशु चिकित्सक मौन जानवरों के वे सच्चे रक्षक हैं. उनकी स्वास्थ्य की रक्षा करना, बेआवाजों की आवाज बनना, और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा करना उनका फर्ज है. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी भूमिका पशु कल्याण से परे है, क्योंकि पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करके, पशु चिकित्सक मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता, और पर्यावरण की भी रक्षा करते हैं.

उन्होंने आगे कहा है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और शुद्ध दूध और डेयरी उत्पाद मिले, जबकि वे नवाचार को भी बढ़ावा दें ताकि क्षेत्र को टिकाऊ और लचीला बनाया जा सके.

जानें मछली पालन और डेयरी को लेकर क्या कहा
मछली पालन के स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जलवायु की दुनिया के संरक्षक हैं, नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करते हुए पोषण और आजीविका की सुरक्षा का समर्थन कर रहे हैं.

उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान और सहानुभूति व्यावसायिक उत्कृष्टता के दो स्तंभ हैं. सभी छात्रों के लिए, उन्होंने यह रेखांकित किया कि खाद्य, स्वास्थ्य, और स्थिरता का भविष्य उनके हाथों में है.

उन्होंने डेयरी क्षेत्र की उत्पादकता और स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती पर ध्यान आकर्षित किया.

उन्होंने चेतावनी दी कि दूध की बढ़ती मांग भारत की देशी नस्लों के नुकसान पर नहीं होनी चाहिए, जो गर्मी के तनाव और रोगों के प्रति स्वाभाविक रूप से सहनशील होती हैं, और जो किसानों और राष्ट्र के लिए पोषण और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण हैं.

उन्होंने कहा कि जब करुणा को प्रतिबद्धता के साथ जोड़ा जाता है, तो यह पशुपालन क्षेत्र को हर किसान और हर घर के लिए स्वस्थ और मजबूत बनाने में सक्षम करेगा.

भारत की डेयरी यात्रा पर विचार करते हुए, उन्होंने कहा कि कैसे सहकारी मॉडल ने देश को विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बनने में सक्षम बनाया है, जो हर साल 230 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक का योगदान करता है.

Written by
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