Home सरकारी स्की‍म Scheme: आंधी-पानी से बागवानी में हुए नुकसान का किसान मामूली प्रीमियम पर ले सकते हैं क्लेम, जानें कैसे
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Scheme: आंधी-पानी से बागवानी में हुए नुकसान का किसान मामूली प्रीमियम पर ले सकते हैं क्लेम, जानें कैसे

बागवानी की तस्वीर.

नई दिल्ली. आंधी-बारिश ​से अगर बागवानी में नुकसान होता है तो किसान बीमा योजना का फायदा उठाकर इसकी भरपाई कर सकते हैं. जी हां आपने सही पढ़ा है. असल में हरियाणा में कई किसानों का नुकसान हुआ है, जिसको देखते हुए कई जिलों में बागवानी अधिकारियों ने इस तरह की पहल की है. अफसरों की पहल पर मुख्यमंत्री बीमा योजना के तहत किसानों को मामूली प्रीमियम पर 40 हजार रुपए तक के नुकसान के लिए क्लेम करने का मौका है. इससे उनके नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो जाएगी और उन्हें दोबारा बागवानी के लिए दिक्कत नहीं होगी.

गौरतलब है कि इस बार आंधी-बारिश से किन्नू बागवानी को नुकसान हो रहा है. बागवानी विभाग अधिकारी इस संकट से बचने के लिए बीमा योजना का पात्र बनने की किसानों से अपील कर रहे हैं. बता दें कि कई जगहों पर पिछले साल के मुकाबले फूल अच्छे आए थे, लेकिन फ्रूट सेट कम हुए हैं. इसके बाद लगातार फल गिरते जा रहे हैं और संख्या लगभग आधी रह गई है. वहीं कुछ जगहों पर माल्टा के बैग में काफी कम फ्रूट बचा है. आंधी के कारण गिरावट का दौर भी जारी है. इससे बागवानी किसानों को नुकसान हुआ है.

बागवानी क्षेत्र हुआ है प्रभावित
एनपीके, सल्फर और अन्य जरूरी दवाइयां का छिड़काव भी कर रहे हैं. सिरसा जिला की बागवानी अधिकारी दीन मोहम्मद ने कहा कि मुख्यमंत्री बीमा योजना है, जिसमें प्रति एकड़ 1000 का प्रीमियम भरकर 40 हजार रुपए का बीमा क्लेम का लाभ लिया जा सकता है. किसान जिला बागवानी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं. गौरतलब है कि सिरसा जिले में सबसे अधिक 20 हजार एकड़ में किन्नू के बाग हैं. इसमें सबसे अधिक रकबा डबवाली के चौटाला व तेजा खेड़ा, अबूबशहर क्षेत्र में है. इसी तरह पूरे हरियाणा के बागवानी क्षेत्र में प्रभाव नजर आ रहा है. इसके अलावा किसान समय-समय पर खेत में निरीक्षण और केयर करते रहें.

नमी से जल्दी निकल रहीं नई टहनियां
अब समय से पहले ही नई टहनियां निकालनी शुरू हो गई हैं. इसमें ज्यादा वाटर शूट है जो हटानी पड़ेगी, जिससे आगामी कुछ दिन के लिए देखभाल की जरूरत है. किसानों ने कहा कि बागवानी विभाग से विशेषज्ञ अधिकारी उनके बीच में नहीं आते हैं, जिसके चलते किसान अपने स्तर पर ही नियंत्रित करने में लगे हुए हैं. बीमा योजना का भी किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है. किसानों का कहना है कि अगर एक्सपर्ट उनके बीच जाएं तो इसका फायदा मिलेगा.

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