नई दिल्ली. अगर आप भी डेयरी फार्म के लिए भैंस की तलाश में है तो बरगुर नस्ल की भैंस को पाल सकते हैं. दक्षिण भारत के तमिलनाडु में पहाड़ियों में पाई जाने वाली इस नस्ल की खासियत है कि इसकी दूध की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है. वहीं यह भैंस अपनी ताकत और सहनशक्ति के लिए भी जानी जाती है. हालांकि दूध उत्पादन बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं होता लेकिन इसके दूध में फैट बहुत अच्छा होता है. वहीं इस भैंस के दूध का टेस्ट भी अच्छा होता है. बता दें कि तमिलनाडु के एरोड जिले और पेरियार जिले के अंथियूर तालुक के बरगुर हिल्स और आसपास के गांव में यह भैंस पाई जाती है.
यहां लोग बरगुर भैंस से दूध उत्पादन करते हैं और इसे छाछ भी बनाते हैं. जबकि भैंस के गोबर से भी कमाई होती है. दूध की खासियत यह है कि यह पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है. खासकर दही और मट्ठा बनाने के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है. क्योंकि यह इलाके हरियाली से भरे हैं. इसलिए बरगुर भैंस को आसानी से पाला जाता है.
कितना होता है दूध में फैट
एक्सपर्ट का कहना है की बरगुर भैंसों को आमतौर पर जंगल और खेतों के किनारे चराई करना पसंद होता है.
तभी ये भैंस पहाड़ी इलाकों जंगलों में आसानी से पाली जाती हैं. जिस वजह से आदिवासी और सीमांत किसानों के लिए बड़ी उपयोगी हैं.
उसके दूध की क्वालिटी की बात करें तो फैट की मात्रा 8.59 फीसदी होती है. जबकि रोजाना यह 7 से 8 लीटर दूध देती हैं.
एक ब्यात में 700 से 1200 किलोग्राम दूध का उत्पादन बरगुर नस्ल की भैंस करती है. ब्यात की औसत उम्र 46 महीने होती है.
इस भैंस की ऊंचाई औसतन 108 सेंटीमीटर होती है. वहीं लंबाई 94 सेंटीमीटर होती है. मादा भैंस की ऊंचाई 102 और लंबाई 93 सेंटीमीटर होती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि सीना 149 सेंटीमीटर तक पहुंचता है. इसकी पूंछ थूथन और आंखों की पलकों का रंग काला होता है.
निष्कर्ष
ये नस्ल अपनी मजबूत शरीर और चुस्ती के लिए जानी जाती है. यदि इस नस्ल की भैंस को पाला जाए तो इससे अच्छी कमाई की जा सकती है.









