नई दिल्ली. फसल में विधिकरण को बढ़ावा देने, सिंचाई और उत्पादकता में सुधार करने के मकसद से प्रधानमंत्री धन्य धान्य कृषि योजना चलाई जा रही है. इसके फायदे की बात की जाए तो किसानों की इससे आए बढ़ाई जा रही है. सरकार देश के कम उत्पादकता वाले कृषि क्षेत्र को विकसित करना चाहती है. बता दें कि इस योजना के तहत 100 जिलों में उत्पादकता वृद्धि, फसल विविधीकरण, सिंचाई और भंडारण में सुधार करने का लक्ष्य सरकार की तरफ से तय किया गया है. दावा किया जा रहा है कि इस योजना के तहत 1.7 करोड़ किसानों को सीधे तौर पर लाभ दिया जा रहा है.
इस योजना के तहत लोन उपलब्ध है. किसानों के लिए अपनी खेती और इससे जुड़े कामों के लिए लोन मिलता है. किसान एप, जिला बैंकिंग प्रणाली और डिजिटल डैशबोर्ड पारदर्शिता पहुंचे और जवाबदेही तय की गई है. ताकि किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सके. वहीं योजना के तहत किसानों को बेहतर भंडारण और पानी की सुविधा भी मिलती है.
किसानों के साथ साझा की अहम बातें
वहीं इस योजना के तहत किसानों को जागरुक करने के मकसद से कृषि विज्ञान केंद्र एसएएस नगर (मोहाली) ने अकालगढ़ गांव में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के बारे में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया था.
इस कार्यक्रम के दौरान, किसानों और किसान महिलाओं को “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” और “छह वर्षीय ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ योजना” के शुभारंभ के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रोसेसिंग उद्योगों आदि की अन्य योजनाओं का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया.
डॉ. बलबीर सिंह खड्डा ने किसानों को इस योजना और अन्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं जैसे कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर निधि, प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन आदि का अधिकतम लाभ उठाने के लिए जरूरी जानकारी दी.
किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदों, किसानों को फसल अवशेषों के सही उपयोग के बारे में भी जागरूक किया.
वहीं खाद्य प्रसंस्करण एवं फसलों एवं दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर भी एक्सपर्ट ने अहम जानकारी साझा की.
निष्कर्ष
बताया गया कि किसानों को वैज्ञानिक फसल उत्पादन और डेयरी फार्मिंग तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया है. वहीं योजना की अहम जाानकारी दी गई ताकि किसान इसका फायदा उठा सकें.












