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Bater Farming Benefits: छोटे स्तर पर शुरू किया था बटेर पालन, आज एक लाख बटेर की करते हैं आपू​र्ति

बटेर पालन करने वाले कारोबारी साजिद.

नई दिल्ली. बटेर भी मुर्गी प्रजाति का ही एक पक्षी है और इसका भी पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है. इसको पालने पर ज्यादा मुनाफा कमाया जाता है. बटेर के अंडे और मीट दोनों की डिमांड रहती है. उत्तर प्रदेश सरकार भी बटेर पालन को बढ़ावा देने का काम का रही है. जिसका फायदा उठाकर कई लोग इस काम में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. बता दें कि जापान और ब्रिटेन में बटेर पालन मांस और अंडे के लिए बहुत ज्यादा होता है. क्योंकि इसका आकार छोटा होता है और कम जगह में भी इसका पालन आसानी के साथ किया जा सकता है. इतना नहीं बटेर पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि केवल 5 सप्ताह में ही यह तैयार हो जाती है. सात सप्ताह में अंडा देना शुरू कर देती है.

बताते चलें कि मेरठ के पशुपालक मोहम्मद साजिद सैफी ने मात्र 50 बटेरों से बटेर पालन की शुरुआत की थी. जिसके बाद आज वो बटेर के सफल पालक हैं. केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (CARI), बरेली और पशुपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन व सुविधाओं के बल पर आज वे प्रतिवर्ष 1 लाख से अधिक बटेरों की आपूर्ति बाजार में कर रहे हैं.

बटेर पालन से जुड़ी अहम बातें यहां जानें
सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक तकनीकों और विभागीय प्रोत्साहन के सहयोग से उनका यह छोटा सा व्यवसाय आज बड़े स्तर पर फैल चुका है.

यह पहल अन्य युवाओं और पशुपालकों के लिए भी स्वावलंबन तथा स्वरोजगार का एक प्रेरणादायक उदाहरण है.

पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि अन्य लोग भी बटेर पालन में आगे आएं तो उन्हें इसका खूब फायदा मिलेगा.

असल में बटेर में अंडे देने की भी काफी अधिक क्षमता होती है. एक बटेर साल में 280 अंडे तक दे देती है.

इसकी तुलना में इसका मांस ज्यादा स्वादिष्ट माना जाता है. इसके अंडे शरीर और दिमाग में वृद्धि के लिए यह सहायक होते हैं.

बटेर पालन में इनके चूजे का खास ध्यान भी रखना होता है. क्योंकि मृत्यु दर सबसे ज्यादा होती है.

छोटे बच्चों में अधिक मृत्यु दर का कारण भूख भी माना जाता है. इसलिए की चूजों को खाना खिलाने और पानी पिलाने का विशेष ध्यान रखना होता है.

अगर बटेर के मांस की बात की जाए तो बहुत अच्छा माना जाता है. ये बहुत ही जूसी होता है. इसका फ्लेवर भी अच्छा होता है.

जबकि ये 1000 से 1200 रुपये प्रति किलो बिकता है. डाइटिशियन भी रेड मीट की जगह लोगों को व्हाइट मीट के सेवन की सलाह देते हैं.

क्योंकि इसमें फैट की मात्रा कम होती है. इसमें कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है. इसलिए यह दिल की सेहत के लिए भी बेहतर है.

बटेर ज्यादा बीमार नहीं होती, इसलिए इसका मांस शुद्ध माना जाता है. इसमें एंटीबायोटिक के अंश भी नहीं पाए जाते हैं.

Written by
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