नई दिल्ली. मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और सेशेल्स गणराज्य जो हिंद महासागर के द्वीपों में शामिल एक द्वीपसमूह देश है के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई. सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्य पालन, कृषि और नीली अर्थव्यवस्था मंत्री वालेस कॉसग्रो ने किया, जबकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किया. इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की, आपसी हित के नए क्षेत्रों का पता लगाया और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के लिए एक मजबूत सहयोग आधारित रोडमैप तैयार किया.
दोनों देशों के बीच गहरे समुद्री सहयोग को रेखांकित किया गया साथ ही, भारत ने मत्स्य पालन, जलीय कृषि, उन्नत वैज्ञानिक शोध और क्षमता-निर्माण के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों पक्षों ने उल्लेख किया कि हिंद महासागर क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक स्थिरता और खाद्य व पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनका आपसी तालमेल बहुत महत्वपूर्ण है.
ग्रामीण रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
बातचीत के दौरान, दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने मछली पालन क्षेत्र और व्यापक ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को आर्थिक विकास, ग्रामीण रोजगार सृजन और सतत विकास को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण स्तंभ माना.
भारत की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि देश में मछली का उत्पादन रिकॉर्ड 19.7 मिलियन टन तक पहुंच गया है और समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 8.46 बिलियन डॉलर का रहा है.
भारत ने सतत मछली पालन प्रबंधन, मछली पकड़ने के ज़िम्मेदार तरीकों और प्रौद्योगिकी-आधारित अवसंरचना विकास के लिए जारी पहलों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.
इस व्यापक एजेंडे में संभावित संयुक्त विकास के लिए कई तरह के तकनीकी क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
जिनमे समुद्री जलीय कृषि, आधुनिक हैचरी की स्थापना, टूना मछली पकड़ने के तरीकों को बेहतर बनाना, स्टॉक का आकलन, मछली पकड़ने के बाद उन्नत इंजीनियरिंग और व्यापक समुद्री संरक्षण शामिल थे.
दोनों देशों ने लक्षित तकनीकी अध्ययनों, संरचित मत्स्य पालन विस्तार सेवाओं, और औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान हस्तांतरण के तत्काल अवसरों का पता लगाया.
प्रतिनिधिमंडलों ने मछली पकड़ने से जुड़ी डेटा प्रणाली, निगरानी, नियंत्रण और चौकसी (एमसीएस) अवसंरचना और मछली पकड़ने के बाद के प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती तकनीक को लागू करने के लिए ठोस साझेदारियों पर चर्चा की.
इसके अलावा, खासकर टूना प्रसंस्करण, उत्पाद विविधीकरण और सतत मत्स्य अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मूल्य श्रृंखला के विकास पर भी जोर दिया गया.
सेशेल्स के प्रतिनिधिमंडल ने खास तौर पर मछली पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में, एक उन्नत कार्य-योजना के साथ, एक द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के ज़रिए काम को तेज़ी से आगे बढ़ाने के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखाई.
उन्होंने दोनों देशों के प्रशासनिक निकायों, शैक्षणिक शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच निरंतर और निर्बाध संवाद की सुविधा के लिए जुड़ाव की संस्थागत व्यवस्था स्थापित करने के महत्व पर जोर दिया.










Leave a comment