Home पशुपालन Lumpy Skin Disease: पशु से लंपी बीमारी को दूर कर देंगी ये जड़ी-बूटियां, कुछ दिनों में मिलेगा आराम
पशुपालन

Lumpy Skin Disease: पशु से लंपी बीमारी को दूर कर देंगी ये जड़ी-बूटियां, कुछ दिनों में मिलेगा आराम

दो महीने का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिससे रोग के प्रसार को समय रहते रोका जा सके.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. एलएसडी यानि लंपी स्किन डिजीज (Lumply Skin Disease) एक विषाणु जनित बीमारी है, जो आमतौर पर मच्छर, मक्खी, कीटों के काटने के कारण होती है. जिससे पशुपालन में नुकसान होता है. हालांकि समय पर देखभाल व सही पोषण से पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है और इस रोग के प्रभाव को कम किया जा सकता है. कहने का मतलब ये है कि कुछ घरेलू नुस्खे हैं, जिन्हें आजमा कर आप पशुओं को लंपी स्किन डिजीज से बचा सकते हैं. जिससे आप पशुपालन में खुद को नुकसान से बचा लेंगे.

इस बीमारी के होने पर उपचार सामग्री एक दिन की खुराक के तौर पर जीरा 10 ग्राम, काली मिर्च 10 ग्राम, हल्दी, धनिया 10-10 ग्राम, दालचीनी 10 ग्राम, चिरायता पाउडर 30 ग्राम, लहसुन 2 कली, छोटा प्याज एक, तुलसी के पत्ते 1 मुट्ठी, नीम के पत्ते 1 मुट्ठी, मरवा के पत्ते एक मुट्ठी, पान के पत्ते 5 और गुड़ (बारीक कूटा हुआ 100 ग्राम ले लें.

तैयारी विधि क्या है
सभी सामग्री को अच्छे से साफ करें. इन्हें कूट-पीसकर बारीक चूरन बना लें. फिर इस चूर्ण को बारीक छान लें. एक साफ बर्तन में निकालकर, उसमें गुड़ मिलाएं.

अच्छी तरह मिलाकर पशु को खिलाएं. इस घोल को ताजा बनाकर प्रतिदिन दें.

वहीं छोटे पशु जैसे बकरी, भेड़, बछड़ा आदि को एक दिन की खुराक के तौर पर सभी चीजों को आधी मात्रा में दें.

लगातार 5-7 दिन देने से लंपी स्किन डिजीज में फायदा मिल सकता है.

फायदे की बात करें तो इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

घाव जल्दी भरने में मदद करता है.

बुखार, सूजन व दर्द में इससे राहत मिलती है.

भूख बढ़ती है और पाचन सुधारता है.

त्वचा व शरीर को जल्दी ठीक होने में सहायक है.

दूध उत्पादन व पशु की सेहत में सुधारता है.

उपचार के साथ स्वच्छ पानी और पौष्टिक आहार दें.

पशुओं को गंदे और गीले स्थान पर न रखें.

मच्छरों मक्खियों व कीटों से बचाव करें.

कमजोर या बीमार पशुओं को अलग रखें.

अधिक लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

पशु की देखभाल के अन्य महत्वपूर्ण उपाय की बात करें तो समय पर टीकाकरण करवाएं.

पशुओं को स्वच्छ व ठंडा पानी दें.

स्वच्छ, सुखा व हवादार स्थान पर रखें.

संतुलित आहार व खनिज मिश्रण दें.

मच्छर व अन्य कीड़ों के लिए दवाओं का छिड़काव करें.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट कहते हैं कि नियमित देखभाल, स्वच्छता और सही पोषण ही पशु को रोगों से सुरक्षित रख जा सकता है. यदि पशु स्वस्थ है तो फिर उत्पादन बेहतर मिलेगा और आपको पशुपालन में फायदा होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालन

Pashu Mela: पशु मेले में मीट और अंडे के तैयाार उत्पाद दिखाए गए, पशुपालकों को एआई के फायदे बताए

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना द्वारा...

पशुपालन

Pashu Mela: पशु मेले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रगतिशील पशुपालकों को किया सम्मानित

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने...

कीड़े बकरे के पेट में हो जाएं तो उसकी ग्रोथ रुकना तय है.
पशुपालन

Goat: गोट फॉर्म में ऊंचे एलिवेटेड शेड नहीं हैं तो लगाएं लकड़ी के तख्त

नई दिल्ली. बकरी पालन (Goat Farming) में बकरियों को बीमारियों से बचाने...