नई दिल्ली. मछली पालन में बायोफ्लाक तकनीक एक बेहतरीन तकनीक है. इस तरीके से यदि आप मछली पालन करते हैं तो बेहद ही आसानी के साथ अच्छी कमाई कर सकते हैं. बायोफ्लाक तकनीक में मछली पालन बेहद ही आसानी के साथ कम जगह और कम पानी में भी किया जा सकता है. इसमें मछली की देखरेख, फीड देना और उनकी देखरेख करना भी आसान होता है. इस तकनीक से मछली पालन करते हैं तो बड़ा तालाब भी नहीं बनवाना पड़ेगा, ना ही ज्यादा पानी की जरूरत होगी. फिर भी आप मछली पालन में कमाई कर पाएंगे.
बिहार सरकार के पशु और मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से बताया गया है कि बिहार सरकार की तरफ से कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिससे किसान मछली पालन कर पा रहे हैं और उससे उन्हें अच्छी कमाई हो रही है.
मछली पालन का आसान तरीका
विभाग की ओर से बताया गया कि कम जमीन वाले मछली किसानों के लिए यह तकनीक बेहद ही फायदेमंद है.
यदि किसी के पास मात्र 5000 वर्ग फीट की जमीन है तो वो वहां पर छोटा बायोफ्लॉक टैंक बनाकर मछली पालन आसानी के साथ कर सकता है.
क्योंकि इतनी जमीन के लिए जो बायो फ्लैट टैंक तैयार होगा. उसमें सिर्फ 15000 लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी लेकिन सालाना 1 टन मछली का उत्पादन किया जा सकता है.
गौरतलब है कि बिहार के नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के मत्स्य पालकों को आधुनिक और उन्नत तकनीकों के माध्यम से सशक्त किया जा रहा है.
इसी क्रम में मत्स्य पालकों को बायोफ्लॉक पद्धति से जोड़ा जा रहा है, जो कम जगह और कम पानी में भी अधिक मछली उत्पादन की एक प्रभावी तकनीक है.
इस नवीन पद्धति के माध्यम से किसान बिना बड़े तालाब के भी अपनी उत्पादन क्षमता और आय में अच्छी बढ़ोतरी कर रहे हैं.
निष्कर्ष
बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बायोफ्लॉक तकनीक न केवल मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है.










