नई दिल्ली. बर्ड फ्लू यानि एवियन इन्फ्लूएंजा की बीमारी पोल्ट्री फार्मिंग के लिए बेहद ही खतरनाक है. इस बीमारी के फैलने से पूरा काम ही बर्बाद हो जाता है. बहुत नुकसान होता है. वहीं इसकी अफवाह भर से पोल्ट्री बर्ड का रेट गिर जाता है. इससे भी पोल्ट्री फार्मर्स को नुकसान उठाना पड़ जाता है. इसलिए इससे बचाव करना बेहद ही जरूरी होता है. हाल ही में बिहार के पटना और भागलपुर जिलों में कौओं की मौत की खबर से एवियन इन्फ्लूएंजा के फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिसके बाद बिहार सरकार ने पांच प्रभावित जिलों में रोकथाम, निगरानी और बायोसिक्योरिटी के उपाय तेज कर दिए हैं.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसधान विभाग की ओर से निर्देशित किए जाने के बाद टीम लगातार बायोसिक्योरिटी अपनाने के लिए मुर्गी पालकों को प्रेरित कर रही है. वहीं सेनेटाइजेंशन का काम भी तेजी से हो रहा है. पोल्ट्री फार्म से लेकर संभावित इलाकों में भी ये काम किया जा रहा है. पटना हाईकोर्ट के परिसर को भी सेनेटाइज किया गया है.
आइए बीमारी के बारे में जानें
मुर्गियों में होने वाला विषाणु जनित रोग है. ये संक्रमित मुर्गी, बत्तख, या पक्षियों से फैलता है.
ये बेहद संक्रामक वायरस जनित रोग है. जिसके कारण मुर्गी पालन व्यवसाय को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
एक्सपर्ट के मुताबिक बर्ड फ्लू के वायरस 70 डिग्री या उससे ऊपर के तापमान पर पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं.
अच्छी तरह से पकाया गया चिकेन और पूरी तरह से उबाला गया अंडा 70 डिग्री से ऊपर के तापमान पर बनाया जाए तो खतरा नहीं होगा.
ऐसे में अच्छी तरह से पकाया हुआ चिकेन और अंडा खाना पूरी तरह से सुरक्षित है.
बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय
पोल्ट्री फार्म, पिंजरे, पानी के बर्तन और आसपास का क्षेत्र नियमित रुप से साफ करें.
जैसे ही कोई पक्षी सुस्त या बीमार दिखे, उसे तुरंत झुंड से अलग करें.
मरे हुए पक्षियों को खुले में न फेंकें, उन्हें गड्ढे में दबाएं या पशु चिकित्सक के निर्देश के अनुसार नष्ट करें.
पक्षियों को संभालते समय दस्ताने और मास्क का उपयोग करें.
पक्षियों को हमेशा साफ पानी और सुरक्षित दाना दें.
पोल्ट्री को खुले तालाब या ऐसे स्थान पर न रखें जहाँ जंगली पक्षी आते हों.
कच्चा या अधपका पोल्ट्री उत्पाद न खाएं.
निष्कर्ष
पोल्ट्री फार्मिंग के लिए बर्ड फ्लू खतरनाक बीमारी है लेकिन ऐसा नहीं है कि इससे बचाव नहीं किया जा सकता है. बस जरूरत जागरुकता की है और समय पर उचित कदम उठाने से इस बीमारी से होने वाले नुकसान से आप मुर्गियों को बचा सकते हैं.












