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Fisheries: छोटे और पारंपरिक मछुआरों को सुरक्षा देता है एक्सेस पास

‘Need national guideline on eco-labeling of marine fishery resources’
Symbolic photo. livestock animal news

नई दिल्ली. हाल ही में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री क्षेत्र को और बढ़ावा देने और ईईजेड का इस्तेमाल करने केे लिए केसीसी ग्राउंड, वेरावल, गुजरात से सभी 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए देश के ईईजेड में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास की शुरुआत की. बता दें कि इस एक्सेस पास की कई खासियत है. जैसे इससे छोटे और पारंपरिक मछुआरों के लिए सुरक्षा मिलती है. पारंपरिक गैर-मोटर चालित मछली पकड़ने वालो को एक्सेस पास की आवश्यकता से छूट दी गई है. पास प्राप्त करने के लिए केवल मशीनीकृत मछली पकड़ने के जहाजों (लगभग 64,000) और 24 मीटर से ऊपर के बड़े मोटर चालित जहाजों की आवश्यकता होती है. यह सुनिश्चित करता है कि छोटे और पारंपरिक मछुआरे सुरक्षित रहें और उनकी आजीविका सुरक्षित रहें.

बताते चलें कि रीएएलसीराफ्ट प्लेटफ़ॉर्म को एक सहज और उपयोगकर्ता के अनुकूल एक्सेस पास प्रक्रिया के लिए अपग्रेड किया गया है. पोत पंजीकरण और लाइसेंसिंग के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और मछुआरों द्वारा पहले से ही व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है.

जीरो टैक्स पूरी तरह से ऑनलाइन एक्सेस पास
एक्सेस पास पूरी तरह से समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से रीएएलसीराफ्ट पोर्टल के माध्यम से फ्री जारी किया जाता है.

एक बार स्वीकृत होने के बाद, पास को मछुआरे के पंजीकृत मोबाइल नंबर या ईमेल पर डिजिटल रूप से वितरित किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और पहुंच में आसानी सुनिश्चित होती है.

रीएएलसीराफ्ट पोर्टल कैच सर्टिफिकेट के लिए एमपीईडीए पोर्टल और स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों के लिए ईआईसी के साथ एकीकृत है. यह एक एकीकृत सिंगल-विंडो डिजिटल इकोसिस्टम बनाता है.

यह एकीकरण पता लगाने की क्षमता को बढ़ाता है, प्रक्रियात्मक देरी को कम करता है और प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय समुद्री खाद्य बाजारों तक पहुंच की सुविधा प्रदान करता है.

मत्स्य पालन विभाग मछली पकड़ने वाले समुदायों की समृद्धि और सुरक्षा में सुधार के लिए कई पहलों को लागू कर रहा है.

समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार देश भर में मछली पकड़ने वाले जहाजों पर एक लाख ट्रांसपोंडर मुफ्त में स्थापित कर रही है.

अब तक 50,000 से अधिक ट्रांसपोंडर स्थापित किए गए हैं, जो मोबाइल नेटवर्क कवरेज से परे भी वास्तविक समय के जहाज ट्रैकिंग, दो-तरफा संचार, संकट अलर्ट और मौसम की चेतावनी को सक्षम करते हैं.

जहाजों को भारतीय तटरक्षक बल जैसी एजेंसियों के साथ जोड़कर, यह पहल प्रतिकूल मौसम और आपात स्थितियों के दौरान मछुआरों की सुरक्षा को विशेष रूप से बढ़ाती है.

इसके अतिरिक्त लगभग 6 लाख मछुआरा परिवारों को मछली पकड़ने पर प्रतिबंध और कम मौसम के दौरान वार्षिक आजीविका सहायता प्राप्त होती है.

दुर्घटना बीमा कवरेज को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है. इससे देश भर में 33 लाख से अधिक मछुआरों को लाभ होता है.

Written by
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