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Bird Flu: कौओं की मौत के बाद बर्ड फ्लू को लेकर बिहार के 38 जिलों में अलर्ट, सेनेटाइजेशन भी किया

बर्ड फ्लू से बचाव के लिए सेनेटाइजेशन करती टीम.

नई दिल्ली. पिछले दिनों बिहार के पटना और भागलपुर जिलों में कौओं की मौत की खबर से H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा के फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिसके बाद बिहार सरकार ने पांच प्रभावित जिलों में रोकथाम, निगरानी और बायोसिक्योरिटी के उपाय तेज कर दिए हैं. ताकि बर्ड फ्लू के संभावित खतरे को खत्म किया जा सके. अधिकारियों ने पटना जिले में AG कॉलोनी और मोकामा, और भागलपुर जिले में सुल्तानगंज के आस-पास के इलाकों से नए सैंपल इकट्ठा किए हैं. ताकि बर्ड फ्लू के खतरे की पहचान की जा सके.

राज्य के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सेक्रेटरी शीर्षत कपिल अशोक ने कहा, हमने 16 से 18 फरवरी के बीच पटना और भागलपुर के अलग-अलग इलाकों में लगभग 68 कौओं की मौत की खबर मिलने के बाद 19 फरवरी को कोलकाता में रीजनल डिजीज डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए नए सैंपल भेजे हैं.

लिए गए हैं सैंपल
अशोक ने कहा कि AG कॉलोनी और IGIMS से इकट्ठा किए गए सैंपल H5N1 वायरस के लिए नेगेटिव पाए गए हैं, जबकि पटना के दूसरे इलाकों से रिपोर्ट का इंतजार है.

राज्य में 28 जनवरी से अब तक अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण 366 कौओं की मौत की पुष्टि हुई है.

अशोक ने कहा कि दरभंगा (200), भागलपुर (70), कटिहार (62), पटना (22) और पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया (12) में मौतें हुई हैं.

सैंपल की शुरुआत में कोलकाता के RDDL में जांच की गई और बाद में कौओं में बीमारी के फैलने की ऑफिशियल घोषणा से पहले, उन्हें कन्फर्मेशन के लिए भोपाल के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज भेजा गया.

राज्य सरकार ने सभी प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन और निगरानी के उपाय बढ़ा दिए हैं. जिसके बाद इस काम को तेजी के साथ किया जा रहा है.

अशोक ने कहा, “एंटीवायरल दवाएं, पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट और डिसइंफेक्टेंट – जिसमें सोडियम हाइपोक्लोराइट और ग्लूटाराल्डिहाइड शामिल हैं.

जो एवियन इन्फ्लूएंजा के खिलाफ वायरस को मारने वाले माने जाते हैं. सभी 38 जिलों में सप्लाई किए गए हैं. हम पोल्ट्री के मामले में अलर्ट हैं.”

इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन (IAHP) के रिसर्च ऑफिसर डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि जमीन पर रोकथाम के बड़े पैमाने पर उपाय किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, “हमने कौओं की मौत के सेंटर के 1 km के दायरे में फ्यूमिगेट किया है और बायोसिक्योरिटी उपायों को मजबूत किया है.

प्रवासी पक्षियों को बसेरा करने से रोकने के लिए पेड़ों की छंटाई की जा रही है, और लोगों को प्रभावित इलाकों में बेवजह आने-जाने से बचने की सलाह दी गई है.

Written by
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