नई दिल्ली. बिहार में काम कर रही प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियां अब बैंक मित्र के रूप में विकसित की जाएंगी. इसके माध्यम से दूध समितियों के व्यापक ग्रामीण नेटवर्क का उपयोग करते हुए किसानों और ग्राहकों को सभी प्रकार की बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. इसके मद्देनजर मंगलवार को काम्फेड और बिहार स्टेट कोआपरेटिव बैंक के बीच करार (एमओयू) साइन हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता बैंक के अध्यक्ष रमेश चन्द्र चौबे ने की. समझौते पर काम्फेड के मैनेजिंग डायरेक्टर समीर सौरभ और बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार ने हस्ताक्षर किए.
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री डा. प्रमोद कुमार ने कहा कि प्राथमिक दूध सहकारी समितियों को माइक्रो एटीएम के माध्यम से नकद जमा, नकद निकासी, बैलेंस जांच, खाता खोलना, डिजिटल लेन देन, ऋण एवं बीमा सेवाओं जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. इससे दुग्ध उत्पादक किसानों, महिलाओं एवं ग्रामीण परिवारों को बैंक शाखा तक जाने की आवश्यकता कम होगी तथा वित्तीय सेवाएं उनके घर तक पहुंच सकेंगी.
बैकिंग व्यवस्था क्यों है जरूरी
मंत्री सुरेन्द्र मेहता ने कहा कि दुग्ध एवं पशुपालन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए सहकारिता और बैंकिंग व्यवस्था का आपसी समन्वय आवश्यक है.
इस पहल से दुग्ध समितियों एवं पशु पालकों को आसान वित्तीय सुविधा मिलेगी, जिससे ग्रामीण रोजगार और आय के अवसर में वृद्धि होगी.
वहीं डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि राज्य सरकार सात निश्चय-3 के संकल्पों को साकार करते हुए दुग्ध क्षेत्र की मजबूती की दिशा में ठोस कदम उठा रही है.
प्रत्येक गांव में डेयरी कोआपरेटिव सोसायटी तथा प्रत्येक पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे.
इससे विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
यह पहल रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और समावेशी विकास को गति देने में सहायक सिद्ध होगी.
निष्कर्ष
सरकार बिहार में भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय के जरिए किसानों की आमदनी को दोगुना करना चाहती है. इसी कड़ी में ये अहम फैसला लिया गया है. इसके अलावा कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं ताकि किसानों को इसका फायदा मिले और वो पशुपालन करके अपनी इनकम को बढ़ाएं. जब पशुपालन बढ़ेगा तो इससे राज्य में दूध उत्पादन भी बढ़ जाएगा. जिसका फायदा हर तबके के लोगों को होगा.









