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PMMSY का फायदा उठाकर मछली पालक कमा रहे मोटा मुनाफा

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
तालाब में पाली गई मछली की तस्वीर.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सरकार मछली पालन पर 40 से 60 प्रतिशत तक सब्सिडी देकर किसानों को आत्मनिर्भर बना रही है. ये योजना 2024-25 तक नीली क्रांति के माध्यम से मछली उत्पादन बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित करने पर केंद्रित है. योजना के तहत बायोफ्लॉक यूनिट, नये तालाब निर्माण, पुराने तालाबों का नवीनीकरण, चारा, बीज, कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड वाहनों की खरीद पर वित्तीय सहायता दी जाती है. योजना के जरिए सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला और दिव्यांग लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध है.

इस योजना के उद्देश्य की बात की जाए तो मुख्य उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में वृद्धि करना और मछली पालकों की आय को दोगुना करना है. मत्स्य व्यवसाय से जुड़कर लोग जहां आत्मनिर्भर बन रहे हैं, वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है.

मुकम्मल ट्रेनिंग भी मिलती है
बिहार के अलग-अलग जिले में मछली पालन के जरिये लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं. राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मछली पालकों को अनुदान दिया जा रहा है.

इससे मत्स्य पालन को लेकर युवाओं का रुझान बढ़ा है और वे इसे रोजगार के बेहतर विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.

जिला और राज्य स्तर पर मछली पालन कर रहे किसानों व इच्छुक युवाओं को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

सरकार की ओर से तालाब निर्माण, पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार, बीज, चारा और मछली विक्रेताओं के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराये जा रहे हैं.

योजनाओं का लाभ लेने के लिए इच्छुक लोग सरकारी पोर्टल या जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं.

इन्हें मिला है योजना का फायदा
इसी कड़ी में नवादा जिले के पैगरी वारिसलीगंज रहने वाले घनश्याम प्रसाद, वर्ष 1988 से मत्स्य पालन का कार्य कर रहे हैं. शुरुआत में ओपन डाक के माध्यम से पांच एकड़ का सरकारी तालाब मिला था.

उस समय संसाधनों की कमी थी, लेकिन अब सरकार हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करा रही है. वर्तमान में 10 एकड़ में मछली पालन कर रहे है और एक नर्सरी भी संचालित कर रहे है.

इसी तरह मठ गुलनी के निवासी सुनील कुमार गांवों में लोगों को देख कर यह काम शुरू किया. विभाग के मदद से आज बेहतर कमाई का साधन हो गया है.

इसमें कम लागत से ज्यादा कमाई होती है. मैं 2 एकड़ में मठ गुलनी में मछली पालन कर रहा हूं, इसके साथ दो एकड़ में वारसलीगंज में मछली पालन कर रहा हूं.

कहा कि लोगों को यह कहना चाहता हूं कि जो किसान केवल धान और गेहूं की खेती करते हैं उससे ज्यादा कमाई मछली पालन में है. पिछले 12 सालों से मछली पालन कर रहा हूं.

Written by
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