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Poultry: बर्ड फ्लू से मुर्गियों को बचाने के लिए पोल्ट्री फार्म में चूना या कीटाणु नाशक दवाओं का करें छिड़काव

पोल्ट्री शेड के निर्माण के लिए ऊंची भूमि का चयन करना चाहिए. कुछ चट्टान वाली जगह होती है, वे ज्यादा अच्छी होती हैं. शेड ऊंची होती है, तो उसके पास जल का भराव नहीं हो पाएगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार की राजधानी पटना और भागलपुर समेत कई शहरों में कौओं की मौत के बाद राज्य का डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है. कौओं की मौत से बर्ड फ्लू के संभावित खतरे को देखते हुए लगातार पोल्ट्री फार्मर्स और आम जनता को जागरुक करने का काम किया जा रहा है. इतना ही नहीं अपनी तरह से टीम को निर्देश दिया गया है कि हर संभावित डेंजर जोन में सेनेटाइजेशन करें और लोगों को जागरुक भी करें. ये दोनों ही काम बिहार में इन दिनों किया जा रहा है.

सरकार की ओर से बताया गया कि बर्ड फ्लू एक संक्रामक बीमारी है, जो मुर्गियों, टर्की, बटेट, गिनी फाउल, कौआ सहित पालतू पक्षियों और जंगली पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करती है. बर्ड फ्लू विषाणु जनित संक्रामक बीमारी है, जो आमतौर पर जंगली या फिर जलीय पक्षी (Water Fowl and Shore Birds) से होती है. सर्दियों का महीना एवियन इन्फ्लूएंजा के वायरस के प्रसार के लिये अनुकूल होता है तथा यह बीमारी एक पक्षी से दूसरे पक्षियों में उनके नासिका के श्राव, बीट एवं शव से फैलताी है.

मुर्गी पालकों को क्या करना चाहिए
एक्सपर्ट कहते हैं कि इस दौरान पोल्ट्री फार्म संचालक घबराएं नहीं.

बायो सिक्योरिटी उपायों का पालन करें और अनावश्यक आवाजाही से बचें.

राज्य सरकार पोल्ट्री व्यवसाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

मुर्गियों को बाड़े में सुरक्षित रखें.

केवल पॉल्ट्री फार्म की देखभाल करने वाले को ही फार्म में प्रवेश करने दें, बाहरी व्यक्तियों का बाड़े में न आने दें.

पोल्ट्री फार्म के प्रवेश द्वार पर कीटाणु नाशक रसायनों का घोल (Foot Dip) रखें. जिससे पोल्ट्री बर्ड को संक्रमण से बचाया जा सकता है.

पोल्ट्री फार्म में चूना अथवा कीटाणु नाशक दवाओं का छिड़काव कराते रहें.

पोल्ट्री फार्म (बाड़े) के पक्षियों को बाहरी पक्षियों के सम्पर्क में न आने दें.

पोल्ट्री फार्म (बाड़े) के साफ-सफाई के साथ उनके दाना-पानी के बर्तन को प्रतिदिन साफ करें.

मुर्गियों के सम्पर्क में आने, पंखों और बीट को छूने के बाद हमेशा साबुन से हाथ धोएं.

मृत मुर्गियों को कभी भी खुले में न फेंके. उसे गहरे गड्ढे में डालकर चूना डालकर मिट्टी से ढक दें.

निष्कर्ष
मुर्गी पालक हमेशा बीमार कुक्कुट को स्वस्थ पक्षियों से अलग रखें तथा मुर्गे मुर्गियों की असामान्य बीमारी या मृत्यु कीसूचना निकटतम पशु चिकित्सालय/जिला पशुपालन पदाधिकारी को दें. क्योंकि ऐसा करने से बहुत बड़े खतरे को रोका जा सकता है.

Written by
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