नई दिल्ली. अपने पालतू जानवरों कुत्ते, बिल्ली की देखभाल कैसे करें, उन्हें वैक्सीनेशन कब कराएं और पशुओं की नस्ल को कैसे सुधार सकते हैं. किसान भाइयों को इन सबकी जानकारी एक ही जगह मिलेगी. शुक्रवार से दो दिवसीय पशु पालन मेले का शुभारंभ गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पंजाब में किया जा रहा है. पशु पालन मेला सभी वर्ग के लोगों के लिए है. कुलपति डॉक्टर जतिंदर पॉल सिंह गिल ने बताया कि हम कम पशुओं में अधिक उत्पादन के लिए पशुओं की नस्ल सुधार पर काम कर रहे हैं. मेले का स्लोगन भी इसी पर है “नस्ल सुधार है, पशु पालन कित्ते दी जान, वधेरे उत्पादन बनाए किसान की शान”
डॉक्टर जतिंदर पॉल सिंह ने बताया, कि यह मेला न केवल पशुपालन, मछलीपालन, मुर्गीपालन, बकरीपालन, सुअरपालकों के लिए बल्कि बच्चों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र होगा. क्योंकि इसमें विभिन्न आयु वर्ग और वर्गों के लिए अलग-अलग वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी. डॉक्टर गिल ने बताया कि बच्चों के लिए गाय, भैंस, बकरी और सजावटी सहित विभिन्न मछली प्रजातियां मुख्य आकर्षण होंगी. शहरी बच्चों के लिए विश्वविद्यालय के देहाती दृश्य विशेष आकर्षण होंगे. पशुपालन मेला पशुपालन और ग्रामीण संस्कृति का अध्ययन करने वाले व्यावसायिक पाठ्यक्रम के छात्रों के लिए अधिक उपयोगी होगा. उन्हें पशुपालन, डेयरी, मत्स्यपालन आदि के क्षेत्र में नवीनतम हस्तक्षेपों के बारे में अधिक बेहद जरूरी जानकारी मिलेगी.
एक्सपर्ट से बात करने का मिलेगा मौका: विस्तार शिक्षा निदेशक डॉक्टर रविंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय के एक्सपर्ट के साथ सेशन, चर्चाओं के साथ-साथ छोटे पालतू जानवरों जैसे कुत्ते, बिल्ली आदि के रखरखाव, टीकाकरण और अन्य समय पर देखभाल के बारे में मौके पर ही जानकारी मिलेगी. किसान अपने पशुओं के खून, पेशाब और दूध के नमूने लेकर आ सकते हैं. मेले में जांच की सुविधा फ्री है. पशुपालकों को बाजार में उपलब्ध नए प्रोडक्टों के बारे में भी जानकारी मिलेगी. मछली पालन मीठे पानी, खारे पानी, सजावटी मछली पालन, मछलीघर निर्माण, मछली प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में मछली पालन के लिए नई तकनीकों का प्रदर्शन करेगा.
एक्वेरियम की मछली के बारे में ले जानकारी: डॉक्टर रविंद्र सिंह ने बताया कि एक्वेरियम की मछली, मछलीघर के पौधे और मछली प्रोडेक्ट सेल के लिए उपलब्ध होंगे. जिन घरेलू महिलाओं ने या तो फ्री रूप से पशुपालन व्यवसाय को अपनाया है या इसमें मदद की है, वे भी पशुधन उत्पादों और उनके उपयोग के बारे में नई जानकारी प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से बातचीत कर सकती हैं. डेयरी और खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा तैयार की गईं स्वादिष्ट शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजनों जैसे मीठी और नमकीन लस्सी, फ्लेवर्ड मिल्क, आइसक्रीम, मोजरेला चीज, मिठाइयां, मट्ठा, पनीर, मिल्क केक, ढोढ़ा बर्फी का स्वाद लेना और उनके बारे में जानने का मौका भी मिलेगा।
मीट अचार और सॉसेज भी मिलेंगे: डॉक्टर रविंद्र सिंह ने बताया कि पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मीट पैटी, मीट अचार, मीट कटलेट, मीट नगेट्स, सॉसेज इस मेले में दिखेंगे. उन्होंने कहा कि हम केवल मूल्य संवर्धन पर ही काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि कम वसा और कम चीनी वाले स्वस्थ भोजन विकसित करने के लिए हमारे प्रयोग चल रहे हैं. विश्वविद्यालय ने सिंथेटिक दूध के बारे में जागरूकता पैदा करने की व्यवस्था की है. विश्वविद्यालय द्वारा एक दूध परीक्षण किट भी उपभोक्ताओं के लिए है.
बेरोजगारों को मिलेगी नई तकनीकि: डॉक्टर ग्रेवाल ने बताया कि पशुपालन के क्षेत्र में नवीनतम हस्तक्षेपों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी राज्य के बेरोजगार युवाओं और सीमांत किसानों के लिए भी बहुत उपयोगी होगी, जो न्यूनतम वित्त के साथ पशुधन क्षेत्र में अपना बिजनेस सेटअप करने के इच्छुक हैं. बैंक, बीमा एजेंसियां और विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ जैसे वित्तीय संस्थान उन्हें नई जानकारी देंगे. मेले में खाद्य प्रसंस्करण मशीनरी भी दिखाई जाएंगी. जो लोगों को साफ, तेज और अच्छी क्वालिटी वाले खाद्य उत्पादों को तैयार करने में शामिल नई तकनीक के बारे में जानकारी देगी.
डॉक्टर ग्रेवाल ने बताया, कि यह एक आम आदमी के साथ-साथ एक उद्यमी के लिए भी फायदेमंद होगा. पशुधन रोगों से संबंधित जानकारी, उनके उपचार के उपाय और पशुधन में नई इकाइयां स्थापित करने के लिए ट्रेनी प्रोग्राम की जानकारी वाले विश्वविद्यालय के प्रकाशन भी हैं. किसान विश्वविद्यालय की मासिक पत्रिका ‘वैज्ञानिक पशु पालन’ के लिए अपना नाम पंजीकृत करा सकते हैं.












