Home पशुपालन देश में पशुओं के चारे की कमी होने की ये है वजह, ग्रास लैंड बनाने की मांग ने क्यों पकड़ा जोर, जानें
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देश में पशुओं के चारे की कमी होने की ये है वजह, ग्रास लैंड बनाने की मांग ने क्यों पकड़ा जोर, जानें

चारे की फसल उगाने का एक खास समय होता है, जोकि अलग-अलग चारे के लिए अलग-अलग है.
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. गर्मी की शुरुआत होते ही जगह-जगह चारे की कमी हो जाती है. ऐसे में किसानों को बहुत ही मुश्किल से पशुओं के लिए चारा मिल पाता. ऐसे में पशुओं को पौष्टिक और हरा चारा कहां से लाएं. इसे लेकर पशुपालक बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं. इंडियन ग्रासलैंड एंड फोडर रिसर्च इंस्टीट्यूट, झांसी के डॉयरेक्टर अमरीश चन्द्रा ने चारे की कमी के बारे में चिंता जाहिर कर जल्द ही सकारात्मक कदम उठाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पर काम नहीं किया गया तो पशुओं के सामने बड़ा संकट पैदा हो सकता है. बता दें कि चारे की कमी को देखते हुए महाराष्ट्र के लातूर जिले में प्रशासन ने जिले से बाहर चारे के ले जाने पर पाबंदी लगा दी है. ये पाबंदी वहां की डीएम ने लगाई है, जिससे लातूर के पशुओं के सामने चारे का संकट पैदा न हो सके. महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखा पड़ने की वजह से भीषण चारे का संकट पैदा हो गया है.

इंडियन ग्रासलैंड एंड फोडर रिसर्च इंस्टीट्यूट, झांसी के डॉयरेक्टर अमरीश चन्द्रा का कहना है कि देश में 12 फीसदी हरे चारे और 23 फीसदी सूखे चारे की कमी है. इसके अलावा खल आदि के चारे में 24 फीसदी की कमी आई है. जिसे जल्द से जल्द दूर करना जरूरी हो गया है. अगर इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो भविष्य में पशुओं और पशु पालकों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी. इसे लेकर किसानों से लेकर कृषि वैज्ञानिकों को मिलकर काम करने की जरूरत है.

चारागाहों पर हो रहे कब्जे को लेकर जताई चिंता
रेंज मैनेजमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया से डॉ. डीएन पलसानिया ने बताया कि हर एक गांव के स्तर पर पशुओं के चरने के लिए एक चारागाह होती है. लेकिन ये खुलासा हुआ है कि चारागाह की बहुत सारी जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया है. इतना ही नहीं बहुत सारी चारागाह की जमीन पर तो स्कूल और पंचायत घर जैसी दूसरी बिल्डिंग तक बना ली गई हैं. इसके चलते पशुओं के लिए चरने तक की जगह नहीं बची है. ऐसे में चारे की कमी का असर सीधे तौर पर दूध उत्पादन को प्रभावित कर रहा है.

नेशनल ग्रासलैंड पॉलिसी बनाने की मांग
डॉक्टर पलसानिया ने बताया कि कांफ्रेंस में इस विषय पर भी चर्चा हुई कि चारागाहों पर हो रहे कब्जे. इसे रोकने और उन्हें हटाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और लोकल प्रशासन की है. लेकिन अक्सर देखा गया है कि आपसी सामंजस्य के चलते चारागाहों पर हो रहे कब्जों को लेकर कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाती है. यहां तक की कई विभागों के होते हुए भी चारागाहों पर स्कूल और पंचायतघर तक बन जाते हैं. लेकिन ऐसे मामलों पर कदम उठाने के लिए कांफ्रेंस में नेशनल ग्रासलैंड पॉलिसी बनाने की मांग उठी है.

लातूर डीएम ने लगाई चारे को दूसरे जिले में ले जाने पर रोक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लातूर की डीएम पांच अप्रैल-2024 को क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति के बीच चारे की संभावित कमी के मद्देनजर जिले के बाहर चारे के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है. अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने औसा, निलंगा, शिरूर अनंतपाल, उदगीर, जलकोट, देवनी, चाकुर और अहमदपुर तालुका के 46 राजस्व क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति घोषित की है. उन्होंने कहा, कलेक्टर वर्षा ठाकुर-घुगे द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अगले छह महीने (अगस्त तक) तक जिले के बाहर चारे का परिवहन नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध गुरुवार से लागू हो गया है.

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