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Dairy: दूध उत्पादन के मामले में राष्ट्रीय औसत से आगे है मध्य प्रदेश, जानें कितना है प्रोडक्शन

हरित प्रदेश मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों को बोनस का तोहफा दिया जा रहा है.
प्रतीकात्मक फोटो. livestock animal news

नई दिल्ली. इसी साल जनवरी में मप्र ऐसा राज्य बन चुका है, जहां पर देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में सर्वाधिक औसत दुग्ध उत्पादन हो रहा है. अगर देश की बात की जाए तो राष्ट्रीय औसत को भी मप्र पीछे छोड़ चुका है. हालांकि अन्य राज्यों से तुलना की जाए तो मप्र दुग्ध उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शुमार है. देश के दुग्ध उत्पादन में 57.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह विश्व रिकॉर्ड है. प्रदेश में दुग्ध उत्पादन का औसत 673 ग्राम प्रति व्यक्ति है, जबकि राष्ट्रीय औसत 471 ग्राम से अधिक है. मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव दुग्ध उत्पादन को लेकर बेहद गंभीर है. यही वजह है कि सरकार इसको लेकर तरह तरह के प्रयास कर रही है.

बता दें कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन का औसत 673 ग्राम प्रति व्यक्ति है, जबकि राष्ट्रीय औसत 471 ग्राम से अधिक है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने भी प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार ही प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों की आय दोगुना करने एवं दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच सहकार्यता अनुबंध (कोलेबोरेशन एग्रीमेंट) किया गया है.

बढ़ जाएगी दूध उत्पादकों की इनकम
सरकार को उम्मीद है कि इस सबके नतीजे में दूध उत्पादकों की कुल वार्षिक आय 1700 करोड़ रूपये से बढ़कर दोगुना से भी अधिक (3500 करोड़ रूपये) हो जाएगी. मध्यप्रदेश देश का डेयरी कैपिटल बन जाएगा. मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रदेश में दूध की खरीद सुनिश्चित करने एवं डेयरी किसानों को दूध की सही कीमत दिलाने में मदद के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में डेयरी सहकारी समिति एवं कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे. वेत क्रांति मिशन के अंतर्गत ढाई हजार करोड़ रूपये के निवेश से प्रत्येक जिले में सांची डेयरी के साथ मिल्क कूलर, मिनी डेयरी प्लांट एवं चिलिंग सेंटर की संख्या में वृद्धि की जाएगी.

सांची ब्रांड होगा और मजबूत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि राष्ट्रीग डेयरी विकास बोर्ड द्वारा प्रदेश के सांची ब्रांड को और मजबूत किया जाएगा. व्यापक प्रचार-प्रसार से इसे राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जायेगा. ब्रांड के नाम में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा. दुग्ध संघ के प्रबंधन एवं संचालन के लिए प्रबंधन शुल्क और नए प्र-संस्करण प्लांट्स और इंफास्ट्रकर के विकास के लिए कोई परामर्श शुल्क नहीं लिया जाएगा. मुख्यमंत्री का कहना है कि आवश्यकता अनुसार तकनीकी एवं प्रबंधन विशेषज्ञों को सरकार के पे-रोल पर दुग्ध संघ में पदस्थ किया जाएगा तथा कार्यरत अमले का हित संरक्षण भी किया जाएगा.

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