नई दिल्ली. भारत दुनिया में नंबर वन दूध उत्पादक देश है और लागतार इसे बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा है. क्योंकि प्रति पशु उत्पादक क्षमता कम है. वहीं अन्य देशों में प्रति पशु उत्पादक क्षमता अच्छी है. भारत में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालने वाले संगठन राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने हाल ही में इसी को लेकर ‘इंडियाज़ फ़ूड सिस्टम्स एट ए क्रॉसरोड्स: नेविगेटिंग द नेक्स्ट फ़ेज़ ऑफ फ़ूड सिस्टम्स ट्रांसफ़ॉर्मेशन’ विषय पर आयोजित हाई-लेवल पॉलिसी डायलॉग में गोलमेज चर्चा में हिस्सा लिया.
इस कार्यक्रम को UN रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ऑफिस की साझेदारी में ‘ग्लोबल एलायंस फ़ॉर इम्प्रूव्ड न्यूट्रिशन’ (GAIN) ने आयोजित किया था. बातचीत की शुरुआत नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास और कर्नाटक एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवाई के साथ एक अनौपचारिक चर्चा (फ़ायरसाइड कन्वर्सेशन) से हुई, जिसका संचालन GAIN के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. लॉरेंस हैडैड ने किया.
मीनेश शाह ने क्या कहा
NDDB के चेयरमैन ने बताया कि कैसे भारत दूध की कमी वाले देश से दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया है.
इस बदलाव में उत्पादकों के स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी समितियों, बेहतर सरकारी नीतियों और लगातार निवेश की अहम भूमिका रही है.
भारत की ज़्यादातर लैक्टो-वेजिटेरियन (दूध-आधारित शाकाहारी) आबादी के लिए प्रोटीन के मुख्य स्रोत के तौर पर दूध के महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने कहा कि यह देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है.
डॉ. शाह ने ज़ोर दिया कि ज़रूरी उत्पादन स्तर हासिल करने के बाद, डेयरी विकास के अगले चरण में चार मुख्य प्राथमिकताओं पर ध्यान देना होगा.
पहला, बेहतर ब्रीडिंग, पोषण और पशु स्वास्थ्य के ज़रिए प्रति-पशु उत्पादकता बढ़ाना, ताकि कम पशुओं से ज़्यादा दूध का उत्पादन हो सके.
दूसरा, डेयरी प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना और कमोडिटी दूध से हटकर वैल्यू-एडेड उत्पादों की ओर बढ़ना ताकि ग्लोबल डेयरी मार्केट में भारत की मौजूदगी मजबूत हो सके.
तीसरा, खाद-से-ऊर्जा (manure-to-energy) और ऑर्गेनिक फ़र्टिलाइज़र मॉडल के ज़रिए सर्कुलर डेयरी की ओर बढ़ना.
वहहीं और चौथा, ‘श्वेत क्रांति 2.0’ (White Revolution 2.0) के तहत सहकारी समितियों का दायरा बढ़ाना ताकि ज्यादा किसानों को संगठित बाज़ारों से जोड़ा जा सके और उन्हें बाज़ार तक पक्की और मुनाफ़े वाली पहुंच मिल सके.
उन्होंने NDDB की पोषण संबंधी पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें विटामिन A और D की कमी को दूर करने के लिए GAIN के सहयोग से किया गया.
दूध का फोर्टिफिकेशन, NDDB फ़ाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन का ‘गिफ्ट प्रोग्राम’ (Giftmilk Programme), और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर ‘शिशु संजीवनी लड्डू’ शामिल हैं.













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