नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में डेवरी और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. राज्य सरकार पशुओं की नस्ल सुधार पर बड़े स्तर पर काम कर रही है, ताकि किसानों और पशुपालकों की आय में स्थायी बढ़ोतरी हो सके. असल में ऐसा होने से राज्य में दूध उत्पादन बढ़ेगा. जिससे मध्य प्रदेश मिल्क कैपिटल बन सकता है. वहीं इसका दूसरा फायदा ये है कि इससे किसानों की इनकम में भी इजाफा होगा. इसलिए सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है.
पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा आधुनिक ‘सेक्स सॉटेंड सीमेन’ तकनीक से कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे गाय और भैंसों में लगभग 90 प्रतिशत तक मादा बछिया या पड़िया पैदा होती है. यह तकनीक डेयरी सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है.
गांव-गांव तक तकनीक पहुंचाएगी सरकार
मादा पशु बड़े होकर उन्नत नस्ल की दुधारू गाय और गैस बनती है, जो प्रतिदिन 10 से 15 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है.
इससे किसानों को आने वाले समय में बेहतर दूध उत्पादन और ज्यादा आमदनी का लाभ मिलेगा. लगभग तीन वर्षों के भीतर इसका सीधा फायदा किसानों की आय पर दिखाई देने लगेगा.
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत मध्यप्रदेश में 1500 मैत्री’ केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं.
‘मैत्री’ यानी मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन इन रुरल इंडिया केंद्रों के माध्यम से गांव स्तर पर कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार का काम किया जा रहा है.
इन केंद्रों के जरिए पशुपालकों को आधुनिक तकनीक की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बेहतर नस्ल के पशु तैयार किए जा सकें.
एक्सपर्ट का कहना है कि नस्ल सुधार के इन प्रयासों से मध्य प्रदेश में यूथ उत्पादन तेजी से बढ़ेगा, जिसका फायदा डेयरी किसानों को मिलेगा.
इससे डेयरी व्यवसाय को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेगी. इसके साथ ही गो-संरक्षण और उक्षत पशुपालन को भी नई दिशा मिलेगी.
सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को आने वाले वर्षों में दूध उत्पादन और डेयरी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि सरकार डेयरी किसानों की मदद से राज्य को मिल्क कैपिटल बनाना चाहती है. जिससे किसानों की इनकम भी बढ़े और वो आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएं.












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