नई दिल्ली. एक समय ऐसा था जब युवा खेती और पशुपालन से दूरी बना रहे थे, लेकिन अब तस्बीर तेजी से बदल रही है. इसकी एक नजीर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रही है. मध्य प्रदेश में युवाओं का रुझान फिर से डेयरी और पशुपालन की ओर बढ़ा है. यही वजह है कि सरकार की डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा आवेदन मिले हैं. प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत 828 डेयरी यूनिट का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अब तक 1421 यूनिट लगाने के प्रस्ताव
मिल चुके हैं.
खास बात यह है कि आवेदन करने वालों में बड़ी संख्या युवाओं की है और इनमें कई पोस्ट ग्रेजुएट युवा भी शामिल हैं. पशुपालन विभान इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत मान रहा है. विभाग का कहना है कि पढ़े-लिखे युवाओं का पशुपालन और खेती-किसानी की और लौटना बताता है कि अब डेवरी सेक्टर को रोजगार और व्यवसाय के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है.
25 गाय या भैंस पर बनेगी एक यूनिट
योजना के तहत कम से कम 25 दुधारू गाय या भैस रखने पर एक यूनिट मानी आएगी.
सरकार ने पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए आकर्षक सब्सिडी का प्रावधान किया है.
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को लागत का 33 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा, जबकि अन्य वर्गों के हितग्राहियों को 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी.
पशुपालन विभाग द्वारा जारी माइडलाइन के मुताबिक एक व्यक्ति अधिकतम 8 यूनिट तक स्थापित कर सकता है. प्रत्येक यूनिट में कम से कम 25 दुधारू पशु होना जरूरी होगा.
देशी नस्ल की गायों वाली एक यूनिट स्थागित करने में लगभग 36 लाख रुपए का खर्च आएगा, जबकि संकर नस्ल की यूनिट पर करीब 42 लाख रुपए तक की लागत आएगी.
सरकार का उद्देश्य बड़े स्तर पर वैज्ञानिक और व्यवस्थित डेयरी इकाइयों को बढ़ावा देना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय दोनों बढ़ सके.
योजना के तहत एक आवेदन पर एक से लेकर अधिकतम 8 यूनिट तक का लाभ लिया जा सकेगा. एक यूनिट के लिए कम से कम 3.50 एकड़ जमीन जरूरी होगी.
यदि कोई व्यक्ति अधिक यूनिट लगाना चाहता है तो उसके लिए अनुपात में एक ही स्थान पर अतिरिक्त जमीन उपलब्ध होना जरूरी है.
योजना के तहत का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया आएगा. सहकारी दुग्ध संघ और दुग्ध समितियों से जुड़े किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी.











