नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में तभी अच्छी कमाई की जा सकती है. जब पशु बेहतर उत्पादन करे. इसके लिए जरूरी है कि पशु पोषण पर ध्यान दिया जाए. इसके साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा जाए कि पशु को जो चारा दिया जा रहा है उसकी लागत भी कम हो लेकिन वो पौष्टिक भी हो. साथ ही साइंटिफिक तरीकों को अपनाना भी जरूरी है. इसी विषय पर गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के पशु पोषण विभाग ने ICAR-01 योजना (कृषि विश्वविद्यालयों को मजबूत और विकसित करना) के तहत, मुल्लनपुर, लुधियाना के सिविल वेटरनरी अस्पताल में अनुसूचित जाति (SC) के किसानों के लिए “बेहतर दूध उत्पादन और टिकाऊ आजीविका के लिए पोषण तकनीकें” विषय पर एक ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया.
विभाग के प्रमुख डॉ. जे.एस. हुंदल ने कोर्स डायरेक्टर के तौर पर काम किया, जबकि डॉ. जुझार सिंह सिद्धू और डॉ. संदीप उनियाल ने प्रोग्राम का समन्वय किया. वेटरनरी साइंस कॉलेज के डीन डॉ. एस.एस. रंधावा ने इस पहल की सराहना की. उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन बढ़ाने, चारे की लागत कम करने और किसानों की आय में सुधार करने के लिए बेहतर पशु पोषण तकनीकों और वैज्ञानिक तरीके से चारा खिलाने के तरीकों को अपनाना समय की जरूरत है.
स्वास्थ्य व उत्पादकता को बेहतर बनाना है जरूरी
डॉ. जुझार सिंह सिद्धू ने संतुलित आहार, जानवरों की पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार राशन तैयार करने और उपलब्ध चारे व अन्य संसाधनों के कुशल उपयोग के महत्व पर जोर दिया.
डॉ. संदीप उनियाल ने व्यावहारिक पोषण तकनीकों, जैसे मिनरल मिक्सचर, बाईपास फैट और यूरोमिन लिक्स पर चर्चा की.
साथ ही उन्होंने जानवरों के स्वास्थ्य व उत्पादकता को बेहतर बनाना जरूरी है और इसमें इनकी भूमिका के बारे में बताया.
डॉ. परशोतम सिंह ने जानवरों के स्वास्थ्य को बनाए रखने और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में खनिजों (मिनरल्स) के महत्व पर जोर दिया.
वैज्ञानिक तरीके से चारा खिलाने की प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए, किसानों को मिनरल मिक्सचर, फोर्टिफाइड डेयरी प्रीमिक्स, बाईपास फैट और यूरोमिन लिक्स मुफ्त में बांटे गए.
बातचीत के सत्रों के दौरान किसानों को चारा खिलाने और पोषण प्रबंधन के बारे में विशेषज्ञों से सलाह लेने का मौका भी मिला.
डॉ. हुंदल ने किसानों पर केंद्रित उन पहलों पर यूनिवर्सिटी के फोकस को दोहराया जो वैज्ञानिक प्रगति को व्यावहारिक लाभों में बदलती हैं.
जिससे किसानों को डेयरी उत्पादकता बढ़ाने, पोषण संबंधी कमियों को दूर करने और अपनी आजीविका को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.












Leave a comment