Home डेयरी Dairy: NDDB ने भेड़, बकरी और ऊंटनी के दूध उत्पादन के फायदे गिनाए
डेयरी

Dairy: NDDB ने भेड़, बकरी और ऊंटनी के दूध उत्पादन के फायदे गिनाए

डेयरी फेडरेशन सिंपोजियम के मौके पर बोलते एनडीडीबी के चेयरमैन.

नई दिल्ली. भेड़, बकरी, ऊंट और दूसरे नॉन-बोवाइन दूध पर 9वें IDF इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन सिंपोजियम के उद्घाटन सेशन के दौरान, NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी शाह ने अपने विचार रखे. उन्होंने इन पशुओं के दूध की जरूरत और इसकी अहमियत के बारे में भी बताया. एनडीडीबी के चेयरमैन ने कहा कि यह सिंपोजियम डेयरी इंडस्ट्री में उभरती चुनौतियों और मौकों पर चर्चा करने के लिए एक जरूरी ग्लोबल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है. डॉ. शाह ने बकरियों, भेड़ों, ऊंटों और दूसरी प्रजातियों के नॉन-बोवाइन दूध की बढ़ती अहमियत पर जोर देने की अपील की.

इस दौरान उन्होंने डॉ. एन. पुन्नियामूर्ति को पद्म श्री मिलने पर बधाई दी और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटने के लिए एथनोवेटरिनरी दवाओं को आगे बढ़ाने में NDDB के सलाहकार के तौर पर उनकी भूमिका की भी सराहना की. उन्होंने सभी डेलीगेट्स का स्वागत किया और भारत को होस्ट देश चुनने के लिए IDF का शुक्रिया अदा किया.

कम इन्वेस्टमेंट की होती है जरूरत
ये जानवर ज्यादातर महिलाओं के मालिकाना हक में होते हैं और उन्हीं के द्वारा मैनेज किए जाते हैं, इनमें कम इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है.

ये नैचुरली क्लाइमेट-रेसिलिएंट होते हैं, और खासकर बढ़ती क्लाइमेट चुनौतियों के सामने न्यूट्रिशन और रोजी-रोटी में अहम भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डेयरी सेक्टर को और ज्यादा सस्टेनेबल बनाने के लिए नॉन-बोवाइन दूध के लिए एक मजबूत वैल्यू चेन बनाने की जरूरत है.

ठीक वैसे ही जैसे हमने NDDB के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन फ्लड’ के तहत बोवाइन दूध की वैल्यू चेन बनाई थी.

उन्होंने गोट ट्रस्ट ऑफ इंडिया द्वारा बकरियों के लिए आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन इक्विपमेंट और कच्छ में अमूल की सरहद डेयरी पहल, ऊंटनी के दूध और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को सफलतापूर्वक खरीदने और उनकी मार्केटिंग करने जैसी तरक्की का जिक्र किया.

उन्होंने ऐसी कोशिशों को बढ़ाने और नॉन-बोवाइन दूध के लिए प्रोड्यूसर-सेंट्रिक मॉडल बनाने के महत्व पर ज़ोर दिया, ताकि यह पक्का हो सके कि कंज्यूमर वैल्यू का एक बड़ा हिस्सा किसानों तक पहुंचे.

उन्होंने पार्टिसिपेंट्स से बेसिक रिसर्च से आगे बढ़ने और नॉन-बोवाइन दूध की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए कंज्यूमर ट्रेंड्स, सस्टेनेबिलिटी, प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, बीमारी मैनेजमेंट और न्यूट्रिशन के साथ जुड़ी एक्शनेबल स्ट्रेटेजी पर मिलकर काम करने की अपील की.

आखिर में, डॉ. शाह ने भरोसा जताया कि यह सिंपोजियम नई जानकारी और प्रैक्टिकल रास्ते पैदा करेगा, और 9वें IDF सिंपोजियम की सफलता की कामना की.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

कंकरेज नस्ल के मवेशी तथा जाफराबादी, नीली रावी, पंढरपुरी और बन्नी नस्ल की भैंसों को शामिल किया गया है. इसमें रोग मुक्त हाई जेनेटिक वाले सांडों को पंजाब सहित देश भर के वीर्य केंद्रों को उपलब्ध कराया जाता है.
डेयरी

Milk: एमपी में बढ़ गया दूध उत्पादन, मिल्क कैपिटल बनने की राह पर है राज्य

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार...

डेयरी

DDGS है डेयरी पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बेहतरीन विकल्प

नई दिल्ली. डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) इथेनॉल उत्पादन यानि मक्का...

livestock animal news
डेयरी

Dairy: एमपी में बनेंगे आदर्श पशु ग्राम, सधरेगी पशु नस्ल, बढ़ेगा दूध उत्पादन

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम की तरह प्रदेश में आदर्श पशु ग्राम...