नई दिल्ली. किसानों की इनकम को बढ़ाने के लिए उन्हें डेयरी फार्मिंग जैसे कामों से जोड़ा जा रहा है और जो किसान इस काम में पहले से हैं, उन्हें बेहतर उत्पादन के तरीकों को बताया जा रहा है. जिससे वो ज्यादा से ज्यादा फायदा ले सकें. इसी कड़ी में वेटनरी यूनिवर्सिटी ने डेयरी किसानों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया था. लुधियाना की गुरु अंगद देव वेटनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के लाइवस्टॉक प्रोडक्शन मैनेजमेंट (LPM) विभाग ने ‘अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों (UG और PG) और किसानों के लिए पशुपालन, डेयरी और मछली पालन में एंटरप्रेन्योरशिप स्किल डेवलपमेंट (स्वरोजगार और रोजगार पैदा करने के लिए)’ प्रोग्राम आयोजित हुआ.
इसके तहत, ‘अनुसूचित जाति सब-प्लान (SC-SP) – भारत में कृषि उच्च शिक्षा को मजबूत करना’ सब-कंपोनेंट के अंतर्गत, गोद लिए गए गांव इस्सेवाल में अनुसूचित जाति समुदाय के डेयरी किसानों के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया. लाइवस्टॉक प्रोडक्शन मैनेजमेंट विभाग के प्रमुख डॉ. यशपाल सिंह ने कोर्स डायरेक्टर के तौर पर काम किया, जबकि डॉ. कुलविंदर सिंह, सुरेश कुमार, रजनीश और प्रतीक धालीवाल ने कॉलेज ऑफ वेटनरी साइंस के डीन डॉ. एस. एस. रंधावा की देखरेख में ट्रेनिंग प्रोग्राम का कोऑर्डिनेशन किया.
प्रैक्टिकल स्किल्स के बारे में मिली जानकारियां
इस प्रोग्राम का मकसद वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग और टिकाऊ पशु उत्पादन में डेयरी किसानों की जानकारी और प्रैक्टिकल स्किल्स को बढ़ाना था.
हिस्सा लेने वालों ने संतुलित आहार, पोषण, साफ-सुथरे आवास, पशु स्वास्थ्य देखभाल और बीमारियों से बचाव के बारे में सीखा.
एक्सपर्ट ने डेयरी किसानों को बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित आहार, पोषण, साफ-सुथरे आवास, पशु स्वास्थ्य देखभाल जरूरी है.
दूध उत्पादन और मुनाफे को बेहतर बनाने के लिए कुशल फार्म मैनेजमेंट पर जोर दिया जाना भी बेहद ही जरूरी है.
प्रोग्राम ने किसानों की आजीविका और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद तरीकों को बढ़ावा दिया.
यह पहल क्षमता निर्माण और टेक्नोलॉजी के प्रसार के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के लिए यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को दिखाती है.
प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर, हिस्सा लेने वाले किसानों के बीच मिनरल मिक्सचर, यूरिया-मिनरल लिक ब्लॉक (यूरोमिन लिक्स) और बाईपास फैट बांटे गए.
ताकि संतुलित पशु पोषण को बढ़ावा दिया जा सके और डेयरी पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादकता के लिए बेहतर खान-पान के तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.
डॉ. एस. एस. रंधावा ने विभाग को बधाई दी और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करने में उनकी कोशिशों की सराहना की.
उन्होंने वैज्ञानिक डेयरी फार्मिंग के तरीकों को बढ़ावा देने और डेयरी किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ऐसे किसान-केंद्रित प्रोग्राम आयोजित करने की यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को दोहराया.












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