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Fish Farming: ताजी मछली के परिव​हन का सिस्टम, बाजार और फिश कियोस्क विकसित करने की है योजना

जब पूरी जानकारी होगी तो नुकसान का चांसेज कम होगा और इससे मुनाफा ज्यादा होगा. इसलिए अगर आप मछली पालन करना चाहते हैं तो जरूरी है कि मछली को खाना खिलाया जाता है उसकी जानकारी तो कम से कम कर लें.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए काम हो रहा है. उत्पादन से बाजार तक वैल्यू चेन विकसित होगी होगी. इसके प्रस्ताव में मछली उत्पादन के साथ बिक्री और किसानों या नाव-जाल, आइस प्लांट, कोल्ड में स्टोर, ताजी मछली के परिवहन के एक वाहन, आधुनिक बोक एवं खुदरा नए मछली बाजार तथा फिश कियोस्क को विकसित करने की योजना है. वहीं मछलियों की ग्रेडिंग, बिक्री और एक निर्यात के लिए बेहतर व्यवस्था के साथ ही आधुनिक प्रोसेसिंग इकाइयों के माध्यम से मूल्य संवर्द्धन पर भी जोर दिया गया है.

साथ ही मछली पालकों को प्रशिक्षण, तकनीक मार्गदर्शन और कौशल विकास से जोड़ने का भी प्रस्ताव है. बात सिफ खगड़िया जिले की करें तो जिला प्रशासन का मानना है कि परियोजना के क्रियान्वयन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

जल संसाधनों का जीआईएस आधारित सर्वेक्षण होगा
जल संसाधनों का जीआईएस आधारित सर्वेक्षण, स्थल सत्यापन, निगरानी और डाटा प्रबंधन कराया जाएगा.

इससे सरकारी और निजी जलकरों, तालाबों, चौरों, नदियों, धाराओं तथा प्राकृतिक जलजमाव वाले क्षेत्रों का समेकित डाटा तैयार हो सकेगा. इसके आधार पर क्षेत्रवार मत्स्य विकास की कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

जिला प्रशासन ने राज्यस्तर पर तकनकी विशेषज्ञ एजेंसी, विभागीय तकनीकी दल, मत्स्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं तथा भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग और राष्ट्रीय मलिककी विकास बोर्ड को विस्तृत डीपीआर तैयार कराने का आग्रह किया है.

तकनीकी सामाजिक और आर्थिक मूल्यांकन के बाद परियोजना की स्वीकृति और वित्त पोषण के लिए आवे की कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है.

वहीं डीएम द्वारा भेजे गये प्रस्ताय में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पेन कल्चर, केज कल्चर, बायोपॉक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर है.

गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की स्थानीय उपलब्धता के लिए हैवरी, बीज बैंक, नर्सरी और रियरिंग तालाब विकसित करने का प्रस्ताव है.

गुणवत्तापूर्ण मत्स्य आहार के लिए फिश फीड मिल, पानी में ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए परेटर तथा मिट्टी और पानी की गुणवता की नियमित निगरानी की व्यवस्था भी प्रस्तावित है.

मछलियों में होने वाले रोगों की पहचान और निदान के लिए निगरानी तंत्र विकसित करने तथा सालभर पानी की उपलब्धता के लिए सील पक पपसेट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है.

निष्कर्ष
बताया जा रहा है कि इन कामों के जरिए मछली पालन में किसानों का काफी सहूलत मिलेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग मछली पालन के काम में आगे आएंगे. जिसका फायदा सीधे तौर पर उन्हें मिलेगा.

Written by
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