नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में एग्रो-इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के 65वें स्थापना दिवस व्याख्यान में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ के तौर पर शिरकत की. जहां उन्होंने डेयरी सेक्टर की अहमियत पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि डेयरी न सिर्फ किसानों की आजीविका के लिए एक मजबूत आधार है, बल्कि भारत की बड़ी लैक्टो-वेजिटेरियन आबादी के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम है. इन दोनों जरूरत को पूरा करने में दूध की अहम भूमिका है. उन्होंने कहा कि कैसे एक बड़ी आबादी मांसाहार की जगह दूध और उससे बने उत्पाद से जरूरी पोषण हासिल करती है.
उन्होंने बताया कि भारत का डेयरी कोऑपरेटिव सिस्टम ‘बड़े पैमाने पर उत्पादन’ (mass production) के बजाय ‘आम लोगों द्वारा उत्पादन’ (production by the masses) का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे 8 करोड़ किसान परिवारों को सहारा मिलता है. डेयरी कोऑपरेटिव आंदोलन के सफरर को बताते हुए, उन्होंने ‘श्वेत क्रांति 2.0’ (White Revolution 2.0) की राह दिखाई.
एनडीडीबी चेयरमैन ने और क्या कहा
▶️ उन्होंने आगे कहा कि ब्रीडिंग, पोषण और स्वास्थ्य रणनीतियों के जरिए जेनेटिक सुधार, डेयरी सेक्टर में सर्कुलैरिटी और सस्टेनेबिलिटी और सुरक्षित दूध व दूध उत्पादों के लिए संगठित बाजार की हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी है.
▶️ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही नीतियों, रणनीतियों और टेक्नोलॉजी को अपनाकर डेयरी सेक्टर में आगे जाया जा सकता है.
▶️ यदि ऐसा होता है तो भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक के तौर पर अपनी स्थिति को और मज़बूत कर सकता है और ‘विकसित भारत 2047’ में अहम योगदान दे सकता है.
▶️ बात करें लैक्टो-वेजिटेरियन आबादी की तो दूध और डेयरी उत्पाद उनके लिए सिर्फ आहार का हिस्सा नहीं बल्कि यह पोषण संस्कृति और व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है.
▶️ असल में भारत में बहुत से लोग मांस, मछली और अंडे का सेवन नहीं करते हैं. ऐसे में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी उन्हें होती है.
▶️ हालांकि शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है. इसलिए लेक्टो वेजीटेरियन लोग पनीर दही घी को अपने भोजन में शामिल करते हैं.
▶️ डेयरी उत्पादों को अपने भोजन में शामिल करने की वजह से लैक्टो-वेजिटेरियन लोगों को जरूरी पोषण मिल जाता है.
▶️ इतना ही नहीं भारत सरकार के कई पोषण कार्यक्रमों में जैसे मिड डे मील में भी बच्चों को कुपोषण से बचने के लिए दूध या उससे बने उत्पाद दिए जाते हैं.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर डेयरी सेक्टर को यूं ही मजबूत किया जाता रहा और सरकारी ढांचा भी मजबूत हुआ तो न सिर्फ किसानों को इससे फायदा होगा बल्कि लैक्टो-वेजिटेरियन आबादी को भी पोषण भरपूर मिल सकेगा.










