नई दिल्ली. भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर के संयुक्त निदेशालय (प्रसार शिक्षा) द्वारा ओडिशा राज्य के पशुपालन विभाग के अधिकारियों के लिए “डेयरी विकास और चारा संवर्धन” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है. 13 से 17 अक्टूबर तक इसमें कुल 15 प्रतिभागी भाग लेंगे. संस्थान के डायरेक्टर डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि संस्थान ने पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. आईवीआरआई अब तक पांच प्रमुख पशु रोगों को देश से समाप्त करने में सहयोग दे चुका है.
उन्होंने कहा कि आईवीआरआई अब तक 50 से अधिक जैव उत्पाद विकसित किए हैं, जिनमें 30 टीके शामिल हैं. ये सभी टीके एवं निदान किटें भारत सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के अंतर्गत उपयोग में लाई जा रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि आईवीआरआई न केवल जैव उत्पाद विकास के क्षेत्र में अग्रणी है, बल्कि पशु उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.
क्या सीखेंगे डेयरी किसान
इस मौके पर ज्वाइंट डायरेक्टर (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी ने कहा कि डेयरी क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख अंग है और देश की खाद्य सुरक्षा एवं रोजगार सृजन में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है.
उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों, मोबाइल एप्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, पॉडकास्ट्स तथा यूट्यूब चैनलों के माध्यम से किसानों एवं पशुपालन अधिकारियों तक ज्ञान का व्यापक प्रसार किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि “निरंतर पशुचिकित्सा शिक्षा” के माध्यम से राज्य अधिकारियों को नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति एवं तकनीकी हस्तांतरण से जोड़ना संस्थान की प्राथमिकता है.
उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे ओडिशा राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं, चुनौतियों एवं अनुसंधान की संभावनाओं को साझा करें, ताकि उन्हें आईवीआरआई के अनुसंधान एजेंडा में सम्मिलित किया जा सके.
प्रभारी, पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन अनुभाग डॉ. मुकेश सिंह ने विभाग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि आईवीआरआई देश में साहीवाल, मुर्राह तथा अन्य देशी नस्लों के संरक्षण एवं सुधार हेतु महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित कर रहा है.
पाठ्यक्रम डायरेक्टर डॉ. अनुज चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डेयरी प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार, पशु आवास एवं पोषण संतुलन, के साथ साथ आधुनिक तकनीकों जैसे-आईवीएफ, एम्ब्रियो ट्रांसफर और एआई के बारे में जानकारी दी जाएगी.
साथ ही मशीन के प्रयोग एवं पीसीआर आधारित लंपी स्किन रोग निदान जैसी व्यावहारिक गतिविधियों के विषय में भी प्रशिक्षण में व्याख्यान तथा प्रेक्टिकल आयोजित किए जाएंगे.












