नई दिल्ली. मध्यप्रदेश में सरकार दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई काम कर रही है. इसी कड़ी में पशुपालकों को दुधारू पशुओं को साइलेज खिलाने के प्रेरित करने का काम भी सरकार की तरफ से किया जा सकता है. एक कार्यक्रम में पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए साइलेज के बारे में पशुपालकों को समझाना जरूरी है. इससे दूध उत्पादन तो बढ़ेगा ही साथ ही पशु भी स्वस्थ रहेंगे. वहीं जब हरे चारे की कमी होगी तो साइलेज इसकी भरपाई करेगा. इससे पशुओं को तमाम पोषक तत्व भी मिलेंगे.
इस दौरान उन्होंने एनडीडीबी द्वारा सांची के उन्नयन के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की. कहा कि बनास डेयरी और अमूल उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं का उदाहरण हैं. मध्यप्रदेश में सांची का कार्य भी एनडीडीबी के सहयोग से सोने पर सुहागा हो गया है. एनडीडीबी के माध्यम से सांची का उन्नयन हो रहा है, यह भी हमारे किसानों के कारण ही है. हम सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि राज्य को मिल्क कैपिटल बनाया जा सके.
इतने गांव सहकारी डेयरी से जुड़ेंगे
वहीं इस मौके पर मैनेजिंग डायरेक्टर एमपीसीडीएफ डॉ. संजय गोवाणी ने कहा कि एनडीडीबी ने दुग्ध उत्पादकों को उनका वाजिब दाम समय पर मिले उसकी व्यवस्था की और ईआरपी सिस्टम लागू किया.
उन्होंने कहा कि किसानों को सहकार से जोड़ने के लिए काम किया जा रहा है. निश्चित ही 50 प्रतिशत गांवों को सहकारी डेयरी से जोड़ा जाएगा.
अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य 26 हजार गांवों में सहकारी डेयरी बनाना है.
वहीं राज्य में पांच साल में 52 लाख लीटर दूध प्रतिदिन स्टोरेज करना और 35 लाख लीटर दूध बिक्री करना भी है. कहा कि लक्ष्य मुश्किल है लेकिन सहकार से इसे पूरा करने में सफल होंगे.
महाप्रबंधक सहकारिता सेवाएं, एनडीडीबी राजेश गुप्ता ने कहा कि सहकार से समृद्धि, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प है.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने की योजना से आगे बढ़ रही है. इसलिए हर वो काम किया जा रहा है, जिससे दूध उत्पादन बढ़ाया जा सके.










