Home पशुपालन Animal Husbandry: गाय-भैंस के हीट में आने के क्या हैं लक्षण, क्यों कराना चाहिए एआई, ये भी जानें यहां
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Animal Husbandry: गाय-भैंस के हीट में आने के क्या हैं लक्षण, क्यों कराना चाहिए एआई, ये भी जानें यहां

दुधारू पशुओं के बयाने के संकेत में सामान्यतया गर्भनाल या जेर का निष्कासन ब्याने के तीन से 8 घंटे बाद हो जाता है.
गाय-भैंस की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन में पशुओं के हीट में आने की अवस्था का पता लगाना बेहद ही जरूरी होती है. जब पशु हीट में आ जाते हैं तो उसके बाद उन्हें एआई या फिर क्रॉस कराया जाता है. अगर पशु हीट में आ गए और उसका पता पशुपालक को नहीं चला तो इससे डेयरी फार्मिंग के काम में नुकसान होता है. बता दें कि गाय और भैंस जब हीट में आती है तब बार-बार चीखना शुरू कर देती है. दूध कम हो जाता है. भूख कम हो जाती है. वहीं बेचैन मालूम पड़ते हैं. जबकि दूसरे पशु के ऊपर चढ़ना शुरू कर देते हैं. वहीं दूसरी गाय के गर्म गाय पर चढ़ने के समय गर्म गाय का चुपचाप खड़ी रहना भी इसके लक्षण हैं.

एक्सपर्ट का कहना है कि जब पशु हीट में आएगा तो बार-बार पेशाब करना शुरू कर देगा. वहीं उनके जगनांग में सूजन आ जाती है. वजाइना से लसलसा, पारदर्शी, चमकदार पदार्थ निकलने लगता है. एक्सपर्ट के मुताबिक यदि गाय या भैंस सुबह में गर्म होती है तो उसी दिन शाम में गर्भाधान कराना चाहिए. अगर कोई गाय या भैंस एक दिन से ज्यादा गर्म रहती है तो उसे करीब बारह घंटे के अंतर पर दो बार गर्भाधान कराना लाभदायक होता है.

कृत्रिम गर्भाधान क्यों?

  1. छोटे पशुपालकों को सांड पालने तथा उसमें होने वाले खर्चों से बचाव.
  2. प्राकृतिक गर्भाधान से होने वाली बीमारियों से बचाव.
  3. आयातित उत्तम नस्ल के सांडों के सीमेन से भी गर्भाधान संभव.
  4. समय पर प्रजनन समस्याओं की पहचान.
  5. गर्म गाय की सही पहचान से सही समय पर गर्भाधान.
  6. छोटी गायों के भी पाल खिलाने में सुविधा.
  7. पाल देने के समय चोट लगने का कोई डर नहीं.

कृत्रिम गर्भाधान क्यों?

  1. छोटे पशुपालकों को साँढ पालने तथा उसमें होने वाले खर्ची से बचाव.
  2. प्राकृतिक गर्भाधान से होने वाली बीमारियों से बचाव.
  3. आयातित उत्तम नस्ल के साँढों के वीर्य से भी गर्भाधान संभव.
  4. समय पर प्रजनन समस्याओं की पहचान.
  5. गर्म गाय की सही पहचान से सही समय पर गर्भाधान.
  6. छोटी गार्यो के भी पाल खिलाने में सुविधा.
  7. पाल देने के समय चोट लगने का कोई डर नहीं.

गायों में विभिन्न जांच क्यों?

  1. उचित समय पर पता लग जायेगा कि गाय गाभिन है या नहीं.
  2. गाभिन होने का पता लग जाने से गाय को संतुलित एवं पौष्टिक आहार दिया जा सकता है.
  3. अगर गाय गाभिन नहीं है तो बगैर समय बर्बाद किए उसका उचित इलाज किया जा सकता है.
  4. उचित समय पर दूध दुहना बंद किया जा सकता है.
  5. यह भी पता लग जाता है कि गाय कहीं अनजाने में तो पाल नहीं खा गई है.
  6. इस तरह समय पर गाभिन का पता लग जाना आर्थिक तौर से फायदेमंद है.

गाय में प्रसव के समय ध्यान देने योग्य बातें

  1. प्रसव का समय नजदीक आने पर अच्छी तरह पचने वाला भोजन देना चाहिए.
  2. प्रसव के समय किसी व्यक्ति को जरूर मौजूद रहना चाहिए.
  3. प्रसव में ज्यादा देर होने पर पशुचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए.
  4. गाय अपने बच्चे की नाभी नहीं काटे.
  5. गाय जेर नहीं खाने पाए.
  6. प्रसव के बाद दो दिन तक गाय के थन से पूरा दूध नहीं निकालें.
  7. प्रसव के थोड़ी देर बाद बच्चे को उसकी माँ का दूध जरूर पिलायें.
  8. प्रसव के बाद गाय को ज्यादा समय तक बैठने नहीं दें.
  9. प्रसव के बाद गाय को मक्खन, घी या तेल नहीं पिलायें।
Written by
Livestock Animal News Team

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