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Dairy Sector: 6.5 लाख में से सिर्फ 2 लाख गांवों में ही है सहकारी संस्थाएं, इसे इतना आगे बढ़ाने का है लक्ष्य

दीक्षांत समारोह में विचार रखते राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी शाह.

नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी शाह ने छत्तीसगढ़ स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पशुधन क्षेत्र कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे सशक्त आधार है. उन्होंने सभी स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोधार्थियों, उनके अभिभावकों तथा विश्वविद्यालय के शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं. अपने संबोधन में डॉ. शाह ने कहा कि जलवायु अनिश्चितता और सिंचाई संबंधी चुनौतियों के दौर में पशुधन किसानों को स्थायी एवं सुनिश्चित आय प्रदान करता है.

साथ ही, ये देश की लगभग 140 करोड़ आबादी की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने बताया कि दूध आधारित प्रोटीन, विशेष रूप से भारत जैसे शाकाहारी प्रधान देश के लिए, पशु प्रोटीन का एक उत्कृष्ट, सुलभ और किफायती स्रोत है. डॉ. शाह ने कहा कि दुग्ध क्षेत्र से प्रतिवर्ष 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मूल्य संवर्धन होता है, जो गेहूं और चावल के संयुक्त योगदान से भी अधिक है.

70–85 प्रतिशत सीधे किसानों तक पहुंचता है
उन्होंने ये भी रेखांकित किया कि डेयरी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को 10 दिनों के भीतर डिजिटल भुगतान सुनिश्चित किया जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिरता सुदृढ़ होती है.

उन्होंने कहा कि भारतीय डेयरी सहकारी मॉडल विश्व में अद्वितीय है, जहां उपभोक्ता द्वारा चुकाए गए मूल्य का 70–85 प्रतिशत सीधे किसानों तक पहुंचता है.

भारत की डेयरी यात्रा के बारे में बात करते हुए डॉ. शाह ने कहा कि एक समय देश दूध के लिए विदेशी देशों पर निर्भर था.

आनंद से शुरू हुए सहकारी मॉडल एवं एनडीडीबी द्वारा कार्यान्वित ऑपरेशन फ्लड’ कार्यक्रम ने भारत को आत्मनिर्भर बनाया.

साल 1998 से भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाया. आज दूध ग्रामीण समाज के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान का सशक्त माध्यम बन चुका है.

उन्होंने बताया कि देश में लगभग 6–6.5 लाख गांवों में से केवल लगभग 2 लाख गांवों में ही सहकारी संस्थाएं मौजूद हैं.

इस अंतर को दूर करने के लिए सरकार द्वारा व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 (White Revolution 2.0) के तहत सहकारी ढांचे के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है.

उन्होंने का कि इसके तहत 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की जा रही हैं.

इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में NDDB के सहयोग से 200–250 गांवों में डेयरी समितियां प्रारंभ की गई हैं, जिससे दूध संकलन में निरंतर वृद्धि हो रही है.

डॉ. शाह ने पशु उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रजनन, पोषण और पशु स्वास्थ्य पर केंद्रित समग्र प्रयासों और स्वदेशी सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास पर चर्चा की.

साथ ही नस्ल सुधार कार्यक्रमों, संतुलित आहार प्रबंधन, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण पहलों तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से निपटने हेतु किए जा रहे प्रयासों पर विचार रखे.

Written by
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