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Milk Production: ये है बाल्टी भर दूध लेने की ट्रिक

कम फाइबर के साथ अधिक कंसंट्रेट या अनाज (मक्का) के सेवन से अधिक लैक्टेट और कम वसा दूध होगा.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन में हर कोई पशुपालक चाहता है कि उसका पशु ज्यादा से ज्यादा दूध दे. एक्सपर्ट कहते हैं कि पशुपालकों को टीएमआर में सारी सामग्रियों जैसे सूखा चारा, कंस्ट्रेट, पूरक को मिलाना चाहिए और पशु को खिलाना चाहिए. वहीं पारंपरिक फीडिंग सिस्टम में दिन में केवल दो बार कंस्ट्रेट खिलाने की बजाय दिनभर समान रूप से खिलाया जाना चाहिए. यह सूखे चारे की पाचनशक्ति बढ़ाता है और पोषक तत्वों के नुकसान को कम करता है. इसके नतीजे में रूमेन माइक्रोबियल प्रोटीन संश्लेषण में इजाफा होता है और इस तरह उत्पादकता में सुधार होता है.

हरे या सूखे चारे के अपर्याप्त सेवन से रूमेन में कम एसिटेट और ब्यूटायरेट उत्पादन होता है और इसलिए कम दूध वसा चिपकाव होता है. हरा चारा (सूखा पदार्थ) सेवन पशु के शरीर के वजन का कम से कम 1 प्रतिशत होना चाहिए. उदाहर के तौर पर हरे चारे के माध्यम से 400 किलोग्राम वजन वाले पशु के लिए 4 किलोग्राम सूखा पदार्थ यानी ताजा आधार पर लगभग 25 किलोग्राम हरा चारा प्रति पशु प्रति दिन देना चाहिए. चारे को लगभग 1-2 इंच लम्बा काटकर खिलाना चाहिए.

हरा चारा खिलाएं: पशु एक्सपर्ट कहते हैं कि कम फाइबर के साथ अधिक कंसंट्रेट या अनाज (मक्का) के सेवन से अधिक लैक्टेट और कम वसा दूध होगा. इसलिए फाइबर और कंसंट्रेट संतुलित करके खिलाएं. ज्यादातर मामलों में 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत फाइबर कार्बोहाइड्रेट आदर्श माना जाता है. रूमेन बफर, जैसे सोडियम बाइकार्बोनेट (50 ग्राम प्रति दिन) और मैग्नीशियम ऑक्साइड (15 ग्राम प्रति दिन), शुष्क पदार्थ का पाचन बढ़ाकर प्रतिबंधित चारा राशन से हुए कम दूध वसा संश्लेषण को ठीक करने के लिए जाने जाते हैं. रूमेन में बेहतर फाइबर पाचन के लिए पहले कटा हुआ चारा और फिर कंसंट्रेट खिलाएं.

ऐसा फीड देने से बचें: एक्सपर्ट की मानें तो फीड के बहुत अधिक बारीक पीसने से अपर्याप्त रूमेन फरमेंटेशन और कम रूमेन माइक्रोबियल प्रोटीन का चिपकता है, जिसके कारण दूध में वसा और एसएनएफ कम हो जाता है. वहीं सूखे चारे के साथ फलियां, अत्यधिक वसा और तेल का सेवन आहार में उच्च अनाज और उच्च अनसैचुरेटेड फैट एसिड के मिलान से रूमेन में माइक्रो आग्रेनिज्म अधिक ट्रांसफैटी एसिड उत्पादन करते हैं. इनमें से कुछ ट्रांसफेट स्तन ग्रंथि में फैट चिपकर गलत प्रभाव डालते हैं.

तेल को उचित मात्रा में दें: कम चारा, उच्च कंसंट्रेट वाले आहार के कारण रूमेन द्रव अधिक अम्लीय हो जाता है, जो माइक्रोबियल संख्या बदल देता है. कुछ बैक्टीरिया एसिडिक पस्थितियों के प्रति संवेदनशील होते हैं. रूमेन माइक्रोफ्लोरा में बदलाव ट्रांसफैटी एसिड संचय करता है और खून में अवशोषण के बाद मिल्क फैट चिपकाव को कम कर सकता है. अधिक वसा या तेल पिलाने से रूमेन फाइबर का पाचन कमजोर होगा और दूध में वसा कम होगी, लेकिन भारतीय परिस्थितियों में यह स्थिति सामान्य नहीं है.

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