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Fish Farming: बैक्टीरियल डिसीज पहुंचा सकता है मछली पालन में बड़ा नुकसान, यहां जानिए पूरी डिटेल

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन भी एक ऐसे व्यवसाय का रूप लेता जा रहा है जिसमें हाथ आजमाकर मछली किसान अच्छी खासी इनकम हासिल कर रहे हैं. मछली पालने के लिए साफ पानी की जरूरत होती है. ये भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि मछलियों को बराबर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती रहे. आमतौर पर मछली पालक रोहू, कतला, मृगल, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प मछलियों को पालकर मुनाफा कमाते हैं. मछली पालन के लिए एक तालाब के निर्माण में करीब 5 लाख रुपये तक की लागत आ सकती है. मछली पालन करने भी बीमारी सबसे बड़ी दुश्मन है.

मछलियां भी अन्य प्राणियों के समान ही प्रतिकूल वातावरण में बीमार हो जाती हैं. बीमारी फैलने ही संचित मछलियों के स्वभाव में फर्क आता है. जिससे मछली पालक को यह पता चल सकता है कि मछली बीमार है और फिर उसका इलाज वह कर सकते हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है की मछली पालक को इस बारे में विस्तृत जानकारी रहे. इस आर्टिकल में हम मछलियों को होने वाली बैक्टीरिया डिसीज के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मछली को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती है.

पखं सड़ने लग जाते हैं: कार्प मछलियों में ऐरोमोनास संक्रमण सर्वाधिक प्रचलित एवं परेशानी वाले रोगों में से एक है. ये जीवाणु ज्यादातर मछलियों की कमजोर अवस्था में रोग पैदा करते हैं. परजीवी से ग्रसित मछलियों में द्वितीयक संक्रमण होने का खतरा बढ़ा देते हैं. खराब जल की गुणवत्ता से जुड़े विशिष्ट तनाव कारकों की अवस्था में ऐरोमोनास संक्रमण अत्यधिक होती है. यह रोग, जीवाणु ऐरोमोनास हाइड्रोफिला, ए. सोबरिया, ए. कैविये तथा कुछ अन्य ऐरोमोनाड के कारण होता है. इस रोग के संकेतिक लक्षण मुख्यतः शरीर पर छोटे रक्तस्राव, भाल्क का क्षरण, छाले, आंखों का उभार, उदर में फैलाव और मटमैले गलफड़ों के साथ पंखों एवं पूंछ का सड़ना या टूटना शामिल है. प्रभावित मछली आमतौर पर आहार ग्रहण नहीं करती और संभवतः जल सतह के निकट अलग-थलग तैरती है.

क्या हैं बीमारी के लक्षण: एक अन्य जीवाणु, एडवर्डसियेला टार्डा से होने वाला रोग एडवर्डसिलोसिस है, जो कि अधिकांशतः कार्प मछलियों को प्रभावित करता है. इस रोग से प्रायः सभी आयु वर्ग की मछली संवेदनशील पाई जाती है. इस रोग के संकेतिक लक्षणों में त्वचा पर फोड़े, उदर का फैलाव, गुदा में सूजन एवं रक्तस्राव, शरीर के उदरीय भाग पर विरंजनता एवं रक्तस्राव शामिल हैं. संक्रमित मछलियों में कभी-कभी चक्राकार गतिशीलता के लक्षण देखे जा सकते हैं. इसके अलावा, पाले गए कार्प मछलियों में फ्लेवोबैक्टीरियम कॉलम्नरे के कारण कॉलम्नरिस रोग एक प्रमुख रोग है. इसके संकेतिक लक्षण मुख्यतः गलफाड़ों के किनारों पर पीले सफेद धब्बों के साथ, त्वचा और गलफड़ ऊतक क्षय देखे जा सकते है.

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