Home मछली पालन Fisheries: ज्यादा उत्पादन के लिए तालाब में कितनी मात्रा में डालें जैविक-रसायनिक खाद, जानें यहां
मछली पालन

Fisheries: ज्यादा उत्पादन के लिए तालाब में कितनी मात्रा में डालें जैविक-रसायनिक खाद, जानें यहां

Interim Budget 2024
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन में मछली के ज्यादा उत्पादन को बढ़ाने के लिए तालाब में मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले जरूरी तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए खाद का इस्तेमाल किया जाता है. इससे मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले तमाम जरूरी तत्व तालाब में खाद के जरिए आ जाते हैं. इससे मछलियों की ग्रोथ तेजी से होती है और बाद में उत्पादन भी अच्छा होता है. फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि जैविक खाद के उपयोग के 15 दिन के बाद रासायनिक खाद का मिश्रण भी डाला जाता है. इसमें यहां इस बात पर जरूरी ध्यान दें कि पानी का रंग साफ होने पर रासायनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. जबकि कम तापमान में रसायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

आपको बता दें कि रासायनिक खाद के तौर पर मछलियों के तालाब में किसान यूरिया, सिंगल सुपर फास्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश का इस्तेमाल किया जाता है. इन्हीं का छिड़काव तालाब में किया जाता है. इसे मछलियों का विकास तेजी से होता है. साथ ही उनके वजन को बढ़ाने में भी मदद मिलती है.

एक हेक्टेयर में कितनी डालें खाद
तालाब में चूने का इस्तेमाल 350 से 500 किलोग्राम हर साल करना चाहिए. वहीं एक हेक्टेयर में मवेशियों का गोबर 10 टन डालना चाहिए. अगर वर्मी खाद डाल रहे हैं तो 5 टन का इस्तेमाल कर सकते हैं. रासायनिक खाद के तौर पर यूरिया 100 से 250 किलोग्राम एक हेक्टेयर में डाली जाती है. सुपर फास्फेट 150 से 200 किलो और जबकि म्यूरेट ऑफ पोटाश 80 से 200 किलोग्राम तक एक हेक्टेयर में डालना चाहिए. जबकि मछली पालन से पहले तालाब में 200 किलोग्राम चूने का इस्तेमाल किया जाता है. एक हेक्टेयर के तालाब में 7 दिन के बाद 5 हजार किलो गोबर की खाद डालनी चाहिए. गोबर की खाद के इस्तेमाल के बाद 15 दिन के बाद रसायनिक खाद डालें.

मछलियों को होती है ये दिक्कतें
फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि मछलियों की सबसे के लिए सबसे अच्छा तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस माना जाता है. जबकि ठंड में यह तापमान घटकर 10 डिग्री के नीचे तक चला जाता है. इस वजह से मछलियों को बेहद ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. उनकी पाचन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है. सांस लेने में भी दिक्कत आती है. प्राकृतिक आहार पर भी बुरा असर पड़ता है. इसीलिए नियमित रूप से तालाब में ताजा पानी भरा जाता है. ताकि तालाब का टेंपरेचर बना रहे और मछलियों को किसी तरह की दिक्कत न आए.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मछली पालन

Fish Farming: बिहार से 39 हजार टन मछलियां बाहर भेजी, 50 हजार टन हुआ फिश फीड का उत्पादन

नई दिल्ली. बिहार राज्य की सरकार बिहार को फिशरीज सेक्टर में आत्मनिर्भर...

मछली के तालाब में चूना पोषक तत्व होता है, ये कैल्शियम उपलब्ध कराने के साथ जल की अम्लीयता को कंट्रोल करता है.
मछली पालन

Fish Farming: एक एकड़ का तालाब को तैयार करने आ सकता है 50 हजार से ज्यादा खर्च

नई दिल्ली. मछली पालन की शुरुआत करने के लिए जरूरी होता है...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fisheries: मछली पालन में छोटी सी गलती पूरे कल्चर कर देती है खराब

नई दिल्ली. फिश एक्सपर्ट का मानना है कि मछली पालन एक ऐसा...

मछली के तालाब में चूना पोषक तत्व होता है, ये कैल्शियम उपलब्ध कराने के साथ जल की अम्लीयता को कंट्रोल करता है.
मछली पालन

Fish Farming: मछली के बच्चों की ग्रोथ के लिए पहले दिन पौष्टिक फीड खिलाना है जरूरी

नई दिल्ली. मछली पालन में भी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता...