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Fish Farming: नैनी, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प जैसी तमाम मछलियों को प्रभावित करती है रेड स्पॉट बीमारी

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछलियों में भी कई तरह की बीमारियां होती हैं. इससे मछलियों की ग्रोथ पर असर पड़ता है. नतीजे में जब मछली पालन में उत्पादन का समय आता है तो उत्पादन कम मिलता है. जिसके चलते मछली पालन के काम में भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ जाता है. बता दें कि मछलियों की तमाम बीमारियों में एपिजूटिक अल्सरेटिव सिंड्रोम यानी आईयूएस जिसे रेड स्पॉट रोग भी कहा जाता है बेहद ही खतरनाक है. ये कई तरह की मछलियों को प्रभावित करता है. जिससे मछली पालन के काम पर असर पड़ता है और मछलियों की ग्रोथ कम दिखाई देती है. उनमें मृत्यु दर भी दिखाई देती है.

आमतौर पर इसे रेड स्पॉट रोग कहते हैं. ये ठंड के समय में मछलियों को ज्यादा प्रभावित करता है. मछलियों को प्रभावित करने वाला या एक फंगल इंफेक्शन है, जो शरीर पर गहरे लाल घाव छोड़ जाता है. जिससे अल्सर जैसी समस्या पैदा हो जाती है. एक बार इस बीमारी के फैल जाने पर तालाब के अंदर तकरीबन 50 फीसद तक मछलियां मर सकती हैं.

इन मछलियों को करती है प्रभावित
डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग बिहार सरकार की तरफ से बताया गया है कि ये बीमारी सामान्य रूप से मछलियों में पाई जाने वाली बीमारी है. इसे लाल घाव भी कहा जाता है.

इस बीमारी से गरई, भाकुर, रोहू, सिंग्धी, मांगुर, गवई, टैंगरा, नैनी, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प जैसी तमाम मछलियां प्रभावित होती हैं.

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण
अगर मछली के शरीर पर पूंछ पर या पंखों के पास लाल धब्बे या गहरी अल्सर दिखाई दें तो जान लें कि मछलियों को रेड स्पॉट की बीमारी हो गई है.

मछलियों की स्किन पर रूई जैसी सफेद या बड़ी परत दिखाना मछली की सुस्ती, खाना कम कर देना और सतह पर तैरना भी इसके लक्षण हैं.

इस तरह करें इलाज
वहीं आप इस संक्रमण को रोकने के लिए एक एकड़ में 200 किलोग्राम की दर से चूना इस्तेमाल करें. खासतौर पर ठंड के मौसम से पहले से करना चाहिए.

इस बीमारी से मछलियों को ज्यादा नुकसान न हो और इससे बचाव करने के लिए संक्रमित तालाब में पानी का स्तर बनाए रखें. जरूरत पड़ने पर पानी बदलते भी रहें.

वहीं आप 40 किलोग्राम चूने के साथ चार किलो हल्दी भी प्रति एकड़ में इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे भी इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है की बीमारियां मछलियों के लिए बेहद खतरनाक होती हैं. बीमारियां हो जाने से मछलियों की ग्रोथ प्रभावित होती है. मछली पालक को नुकसान होता है. इसलिए उनसे बचाव करना बेहद ही जरूरी है.

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