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Fish Farming: छत्तीसगढ़ में फिशरीज सेक्टर में पीएमएमएसवाई के तहत 900 करोड़ का हुआ है निवेश

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने छत्तीसगढ़ में राज्य के मछली पालकों, उद्यमियों और हितधारकों के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि इन सभी का योगदान मत्स्य पालन के क्षेत्र की उल्लेखनीय वृद्धि में महत्वपूर्ण रहा है. उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यापार में व्यवधान के बावजूद भारत ने 198 लाख टन का रिकॉर्ड मत्स्य उत्पादन और 73,890.46 करोड़ रुपये का समुद्री खाद्य निर्यात हासिल किया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण बीज, चारा और आधुनिक जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों के लिए पीएमएमएसवाई के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिससे राज्य का मछली उत्पादन लगभग दोगुना होकर 10 लाख टन हो गया है.

बताया कि सरकार के क्लस्टर-आधारित विकास के मद्देनजर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिसूचित मत्स्य पालन क्लस्टरों को उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार संपर्क सहित सभी स्तरों पर व्यापक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके और निर्यात को प्रोत्साहन मिल सके.

निर्यात के लिए रोडमैप तैयार करना जरूरी
उन्होंने राज्य सरकार, अनुसंधान संस्थानों, निर्यातकों और किसानों को मूल्य श्रृंखला में मौजूद कमियों को दूर करने, आईसीएआर संस्थानों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया.

साथ ही क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने और राज्य के लिए एक समर्पित निर्यात रोडमैप तैयार करने में घनिष्ठ सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने एमपीईडीए से छत्तीसगढ़ में अपनी उपस्थिति बढ़ाने तथा हितधारकों के लिए बाजार तक पहुंच, निर्यात संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्राप्त करने के अवसरों को सुगम बनाने का भी आग्रह किया.

बैठक के बाद डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रायपुर के माना स्थित एमएम हैचरी का दौरा किया, जहां उन्होंने तिलापिया मछली में आनुवंशिक सुधार और जलीय कृषि क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उत्पादन होता है.

साथ ही उन्होंने यहां संबंधित पहलों की समीक्षा की और मछली पालकों के साथ संवाद किया. एमएम हैचरी एक समर्पित तिलापिया हैचरी है, जो गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन और आनुवंशिक रूप से उन्नत काली स्ट्रेन तिलापिया के विकास से जुड़ी है.

अपने चल रहे आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम के माध्यम से हैचरी मत्स्य बीज की गुणवत्ता, उत्पादकता और समग्र मत्स्य पालन प्रदर्शन में सुधार कर रही है, जिससे तिलापिया पालन के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है.

इन प्रयासों को समर्थन देने के लिए पीएमएमएसवाई के उद्यमिता मॉडल के तहत 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है.

इसके अतिरिक्त, रोजगार सृजन और रसद सहायता के लिए पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत इस हैचरी को 35 लाख रुपये का प्रदर्शन अनुदान प्राप्त हुआ है.

इससे एक मज़बूत तिलापिया मूल्य श्रृंखला विकसित करने में इसकी भूमिका और मजबूत हुई है.

हैचरी पूरे देश में गुणवत्तापूर्ण तिलापिया बीज की आपूर्ति करती है और छत्तीसगढ़ में लगभग 25,000 टन तिलापिया उत्पादन को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है.

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