नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में उन्नत नरल के गोवंश को बढ़ावा देने का काम सरकार कर रही है. असल में सरकार प्रदेश को एक ट्रिलियनन वाली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए डेयरी सेक्टर की भूमिका को अहम मान रही है. इसी क्रम में पशुपालन विभाग की ओर से नंद बाबा दुग्ध मिशन और दुग्ध प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत कई काम हो रहे हैं. पिछले दिनों बरेली में आयोजित डेयरी कॉन्क्लेव में पशुधन और दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल डेयरी विकास के तहत बेहद ही महत्वपूर्ण हैं और आने वाले समय में यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख डेयरी हब बन सकते हैं.
उन्होंने सरकार के लक्ष्य के बारे में बताते हुए कहा कि सिर्फ दूध का उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है. बल्कि दूध से जुड़े पूरे कारोबार को मजबूत करने का प्रयास सरकार की तरफ से किया जा रहा है. इससे किसानों की इनकम बढ़ेगी और महिलाओं और युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
क्या है यूपी सरकार का लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि डेयरी सेक्टर को आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रोसेसिंग सुविधाओं से जोड़कर किसानों और पशुपालकों को मजबूत बाजार उपलब्ध कराना सरकार का लक्ष्य है.
सरकार का मानना है कि पशुपालन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है. ये सेक्टर प्रदेश की वन ट्रिलियन इकोनामी के लक्ष्य में अहम भूमिका निभा सकता है.
यही वजह है कि कई योजनाओं को लागू करके किसानों को हर सहूलत मुहैया कराई जा रही है. जिससे वो पशुपालन के काम में आगे आएं और अपनी इनकम को बढ़ा सकें. साथ ही प्रदेश की तरक्की में सहयोग कर सकें.
नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल में करीब 2200 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 1200 लाख रुपए से अधिक की अनुदान राशि दी चुकी है.
दुग्ध नीति 2022 के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए 11 लाख रुपए का अनुदान भी जारी किया गया है.
सरकार की तरफ से जीबीसी के तहत बरेली मंडल को 2712 करोड़ रुपए, मुरादाबाद में 2085 करोड़ और लखनऊ में 2150 करोड़ रुपए की निवेश के प्रस्ताव मिले हैं.
सरकार को मिले इस प्रस्ताव से मंत्री ने उम्मीद जताई है कि इससे राज्य में 11 हजार नए रोजगार सृजित होंगे.
वहीं कार्यशाला में स्वदेशी उन्नत गोवंश, आधुनिक डेयरी तकनीक, जैविक खेती, वर्मी कंपोस्ट और हरा चारा प्रबंधन सहित तमाम विषयों पर जानकारी दी गई.










