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Fish Farming: उत्तर प्रदेश समेत इन राज्यों में तिलापिया मछली का हो सकता है अच्छा प्रोडक्शन

नई दिल्ली. तिलापिया (Tilapia) मछली अपनी तेज वृद्धि, कम लागत और पौष्टिकता के कारण जलीय चिकन के रूप में भी जानी जाती है. इसकी ज्यादा डिमांड की वजह ये है कि इसका मांस सफेद और मुलायम होता है. जबकि ये हल्का भी होता है, जिसमें अन्य मछलियों की तरह तेज गंध नहीं आती. इसलिए इसे लोग ज्यादा खाना पसंद करते हैं. इसकी फार्मिंग की बात की जाए तो इसे आसानी से पाला जा सकता है. ये मीठे पानी में पाली जाती है. जिसके चलते केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय की ओर छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में इसके पालन को बढ़ावा देने काम किया जा रहा है.

असल में छत्तीसगढ़ उन राज्यों में शामिल है, जिन्हें विभाग ने तिलापिया मछली के विकास की क्षमता वाले राज्यों के रूप में चिह्नित किया है. इसके अलावा झारखंड, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और केरल भी शामिल हैं. ये राज्य अपने मीठे जल संसाधनों का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर निर्यात-उन्मुख तिलापिया उत्पादन विकसित कर सकता है. जो प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, गुणवत्ता आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं से जुड़ा होगा.

कितना हुआ ता था निर्यात
अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि के तीव्र विस्तार से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को विविधतापूर्ण बनाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है.

उभरती निर्यात-उन्मुख प्रजातियों में तिलापिया ने अपनी बढ़ती वैश्विक मांग, जलीय कृषि प्रणालियों के अनुकूलन और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता के कारण प्रमुखता हासिल की है.

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में चिन्हित मीठे पानी/अंतर्देशीय मछली प्रजातियों का 32,324 एमटी निर्यात किया, जिसका मूल्य 535.21 करोड़ रुपये था.

तिलापिया विश्व में सबसे अधिक व्यापार की जाने वाली मीठे पानी की मछली प्रजातियों में से एक है, जिसकी फ्रोजन फिलेट्स और मूल्यवर्धित उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है.

हालांकि, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 189.73 करोड़ रुपये मूल्य की 22,601 एमटी तिलापिया का निर्यात किया, जो मात्रा के हिसाब से देश का सबसे बड़ा मीठे पानी की मछली का निर्यात है.

वहीं वैश्विक बाजार में इसकी हिस्सेदारी अभी भी कम है, जो निर्यात विविधीकरण और भविष्य में विकास की अपार संभावनाओं को उजागर करती है.

तिलापिया क्लस्टर में 9 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है, जिसमें ऋण देने वाली संस्थाओं से ऋण सहायता के माध्यम से 4 करोड़ रुपये से अधिक और एनएफडीबी उद्यमिता मॉडल के तहत 5 करोड़ रुपये शामिल हैं.

ये पहलें (हस्तक्षेप) उद्यमिता को बढ़ावा देकर, वित्त तक पहुंच में सुधार करके और क्लस्टर के भीतर मूल्य श्रृंखला संबंधी अवसंरचना को मजबूत करके एक सुदृढ़ जलीय कृषि इकोसिस्टम के विकास में सहायता कर रही हैं.

Written by
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