नई दिल्ली. मछली पालन को बढ़ावा देने तथा मछुआरों और मछली पालकों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा देने करने के उद्देश्य से बिहार सरकार सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना चला रही है. इस योजना के तहत मत्स्य व्यवसाय से जुड़े सभी पात्र लोगों को पांच लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर दिया जाएगा. लाभार्थी को योजना का फायदा लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, सरकार का मानना है कि मछली पकड़ने, तालाबों के रखरखाव और अन्य कार्यों के दौरान मछुआरे एवं मछली पालक अक्सर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना चलाई जा रही है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमा प्रीमियम की पूरी राशि सरकार वहन करेगी. जिससे लाभार्थियों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. पंजीकृत मछुआरों को दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी पूर्ण विकलांगता पर 5 लाख, स्थायी आंशिक विकलांगता पर 2.5 लाख, और अस्पताल में भर्ती होने पर 25,000 तक का चिकित्सा खर्च मिलता है. इसके लिए लाभार्थी को कोई प्रीमियम नहीं देना होता है.
योजना की पूरी डिटेल यहां पढ़ें
वहीं योजना के तहत मछुआरों और मछली पालकों को आधुनिक तकनीक, मत्स्य पालन प्रबंधन, व्यवसाय विस्तार के लिए फ्री प्रशिक्षण दिया जाता है.
मछुआरे अपना निबंधन अपने संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय या एनएफडीपी पोर्टल के माध्यम से करवा सकते हैं.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत ‘समूह दुर्घटना बीमा योजना’ (GAIS), एनएफडीपी पंजीकरण, मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड व प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण अभियान चलाया गया.
इस योजना के अंतर्गत 18 से 70 वर्ष की आयु वर्ग के मछुआरे का बीमा कवरेज किया जाना है.
योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक मछुआरों और मछली पालकों को पहले मत्स्य विभाग में पंजीकरण कराना होगा.
आनलाइन आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति तथा मत्स्य पालन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा.
मुधबनी के जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि आवेदन प्राप्त होने के बाद दस्तावेजों की जांच की जाएगी.
इसके अलावा फील्ड अधिकारी संबंधित मछली पालक या मछुआरे के तालाब एवं कार्यस्थल का निरीक्षण भी करेंगे.
सभी प्रक्रिया पूरी होने और पात्रता की पुष्टि होने के बाद लाभार्थियों को योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा.
विभाग का मानना है कि इस योजना से न केवल मछुआरों और मछली पालकों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि जिले में मत्स्य पालन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.











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