नई दिल्ली. मछलियां भले ही पानी से भरे तालाब में 24 घंटा रहती हों, बावजूद इसके उन्हें भी ठंड लगती है और ज्यादा ठंड लगने की वजह से मछलियां बीमार भी हो जाती हैं. उनकी ग्रोथ रुक जाती है, जिसकी वजह से मछली पालक को नुकसान होने लगता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मछलियां ठंडे खून वाली प्राणी होती हैं. इसके चलते शरीर में खुद से गर्मी पैदा करना उनके बस में नहीं होता. जिसके चलते मौसम का सीधा असर उनके शरीर पर पड़ता है. जैसे इस वक्त सर्दियों का मौसम चल रहा है तो उनका व्यवहार बदल जाता है.
फिशरीज एक्सपर्ट कहते हैं कि सर्दियों में मछलियों का मेटाबालिज्म धीमा पड़ जाता है और मछलियां गहरे पानी में जाना पसंद करती हैं, जो तालाब ज्यादा गहरे नहीं होते हैं उन तालाबो में मछलियों को ज्यादा ठंड लगती है. इसलिए तालाब की गहराई 6 से 8 फीट रखना चाहिए और हो सके तो पानी का स्तर कम नहीं होने देना चाहिए.
क्यों लगती है मछलियों को ठंड
एक्सपर्ट कहते हैं कि झील, नदी और समुद्र में रहने वाली मछलियों की अपेक्षा तालाब में रहने वाली मछलियों को ज्यादा ठंड लगती है.
जबकि ज्यादातर किसान भाई तालाब में ही मछली पालन करते हैं और इससे उन्हें बढ़िया कमाई भी होती है. इसलिए तालाब का ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है.
समुद्र, नदियों में पानी बहता रहता है. इसलिए तापमान बहुत ज्यादा नहीं गिरता जबकि तालाब में पानी रुका रहता है. इस वजह से तापमान गिर जाता है.
तालाब का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक गिर जाता है. बता दें कि तालाब के अंदर मछलियां अपनी प्रजाति के मुताबिक तीन स्तर पर रहती हैं.
कुछ मछलियां सतह पर रहती हैं. कुछ मछलियां पानी के बीच में कुछ मछलियां तली में रहती हैं.
जब ठंड बढ़ जाती है तो सतह और बीच में रहने वाली मछलियां तली की ओर चली जाती हैं. क्योंकि तली के पानी का तापमान ऊपर के मुकाबले सामान्य होता है.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट कहते हैं कि ठंड में मछलियों की नियमित निगरानी जरूरी है. समय पर पानी बदलते रहना चाहिए. तापमान पर नजर बनाए रखना चाहिए और हलचल बनाए रखना भी बेहद ही जरूरी है. इससे मछलियों को बीमार होने से बचाया जा सकता है. सही देखभाल की जाए तो सर्दी की मौसम मछलियों की सेहत बनी रहती है और मछली पालकों को नुकसान नहीं होता है.












