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Fish Farming: ड्रोन से मछलियों को दिया जा सकेगा फीड, मछली पालन में मिलेगी सहूलत

चिलचिलाती गर्मी में मछलियों को सूखा चारा नहीं देना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

नई दिल्ली. भविष्य में मछली पालक तालाब में पल रही मछलियों को फीड खिलाने के लिए नाव चलाने के बजाय ड्रोन का इस्तेमाल करते दिख सकते हैं. दरअसल, मत्स्य पालन विभाग के मछली तकनीक मंडप में, मछली पालन की नई तकनीकें प्रस्तुत की जा रही हैं, जिसमें यह भी बताया गया है कि ड्रोन नीली अर्थव्यवस्था क्षेत्र में कैसे बदलाव ला सकते हैं. गौरतलब है कि जलाशयों में मछली का चारा ले जाने के लिए वाले ड्रोन के उपयोग को लेकर​ डिजाइन पेश की गई. एक्सपर्ट का कहना है कि ये बड़ा बदलाव होगा. जिसका फायदा मछली पालकों को मिलेगा.

इससे पहले मछली तकनीक मंडपम का उद्घाटन मत्स्य पालन राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी की उपस्थिति में किया.

क्या-क्या और तकनीकें प्रदर्शनी में पेश की गईं
प्रदर्शन पर रखी गई तकनीकों में ड्रोन-आधारित मछली पकड़ने और परिवहन शामिल हैं, जिनका परीक्षण जीवित या ताजी मछलियों को सीधे बाजारों तक पहुँचाने के लिए किया जा रहा है.

डीजल-पावर की जगह ड्रोन भी विकसित किए जा रहे हैं. वहीं पिंजरा पालन में नावों की जगह ड्रोन उपयोग किया जाएगा तो तो चारा सीधे पिंजरों तक पहुंचाने आसानी होगी.

बताते चलें कि जलीय कृषि प्रणाली (आरएएस) और बायोफ्लोक विधियां भी प्रदर्शन का हिस्सा थीं.

आरएएस, मछलियों के लिए स्थिर स्थिति बनाए रखने के लिए तालाब के पानी को फिल्टर के माध्यम से पुनर्चक्रित करता है.

जबकि बायोफ्लोक अपशिष्ट को प्रोसेस करने और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग करता है.

राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि इन प्रणालियों के लिए शुरुआती निवेश 8 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच है.

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 17 हजार से अधिक इकाइयों को मंजूरी दी गई है.

एक्वापोनिक्स को एक एकीकृत विधि के रूप में प्रदर्शित किया गया जहां मछली टैंकों का पानी पौधों की वृद्धि में सहायक होता है.

पिंजरा पालन को जलाशयों या सेसों में रखे गए बाड़ों में मछली पालन की तकनीक के रूप में प्रस्तुत किया गया था.

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