नई दिल्ली. ठंड के मौसम में मछलियों के लिए तालाब का जल प्रबंधन बेहद ही जरूरी काम में से एक है. क्योंकि मछली पालन में इसका अहम रोल होता है और कहीं न कहीं मछली की ग्रोथ और उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ता है. इसलिए वॉटर मैनेजमेंट कैसे किया जाए, यह हर मछली पालकों को आना ही चाहिए. तभी मछली पालन के काम में उन्हें अच्छा मुनाफा मिल पाएगा. वहीं वॉटर मैनेजमेंट सही तरह से न कर पाने की स्थिति में मछलियों की ग्रोथ और उत्पादन पर असर पड़ सकता है और मछली पालन के काम में बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) बिहार सरकार की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया गया कि ठंड के मौसम में मछलियों की शारीरिक गतिविधियां धीमी हो जाती हैं. ऐसे में जल प्रबंधन बेहतद ही जरूरी है. आइए जानते हैं कि क्या-क्या करना चाहिए.
इन कामों को जरूर करें मछली पालक
ठंड के महीने में मछलियों के अंदर फीड खाने की क्षमता कम हो जाती है. यानी उन्हें ज्यादा फीड देते हैं तो इससे तालाब में कहीं ना कहीं गंदगी होगी, और इसके चलते मछलियों को दिक्कत होगी.
इतना ही नहीं मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी ठंड के समय में कम हो जाती है. इसलिए उन्हें जल्दी से कोई भी बीमारी लग सकती है. इसका भी ख्याल मछली पालक को करना चाहिए.
यही वजह है कि फिशरीज एक्सपर्ट वॉटर मैनेजमेंट पर मछली पालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.
जल प्रबंधन करने के लिए ठंड के मौसम में तालाब की गहराई 6 से 8 फीट रखें. वहीं हर 15 से 20 दिन में 10 से 20 परसेंट पानी को बदल दें.
पानी बदल देने से तालाब के अंदर ताजा पानी आ जाएगा. इससे तालाब के पानी का टेंपरेचर मछलियों के लिए उपयुक्त बना रहेगा और उन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं लगेगी.
वहीं ज्यादा पानी ठंडा होने की वजह से ऑक्सीजन लेवल भी कम हो जाता है. इससे भी बचना चाहिए.
इस बात कभी ख्याल रखें कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी अचानक तालाब में नहीं डालना चाहिए. तालाब में जो भी पानी डालें, वह ताजा होना चाहिए.
निष्कर्ष
यदि इस तरह से जल प्रबंधन करेंगे तो मछली पालन में ठंड के दौरान आने वाली मुश्किलों से मछलियों को बचा पाएंगे और इसे खुद को आर्थिक नुकसान होने से भी मछली पालन बचा पाएंगे.












