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Animal News: NBAGR ने गायों की चार नस्ल को दी मान्यता, दूध उत्पादन से लेकर हर गुण में हैं खास

वृंदावनी गाय की तस्वीर.

नई दिल्ली. नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) ने कई पशुओं की नस्ल को मान्यता दी है. इसमें चार गाय की नस्ल को भी रजिस्टर किया गया है. जिसमें रोहिलखंडी, मेदिनी, करण फ्राइज़ और वृंदावनी गाय की नस्ल शामिल है. इसमें पहली नस्ल रोहिलखंडी की बात की जाए तो ये उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाई जाती है. इनका रंग ज्यादातर सफेद और ग्रे होता है. इनका चेहरा पतला, सपाट या धंसा हुआ होता है, और पलकें सफेद होती हैं. सींग ज्यादातर बाहर की ओर, ऊपर की ओर मुड़े हुए होते हैं, और सिरे पर नुकीले होते हैं.

पूंछ लंबी होती है. जबकि माथा सीधा होता है जिसमें एक उभरा हुआ सिर का हिस्सा और पतला, सपाट और धंसा हुआ चेहरा होता है. इस नस्ल के बैल अपेक्षाकृत लंबे होते हैं और उनमें बहुत ज्यादा वजन खींचने की शक्ति होती है. औसत दूध उत्पादन 5.21 किलोग्राम प्रतिदिन होता है, और दूध देने की अवधि औसतन 210 दिन होती है. अनुमानित आबादी लगभग 3 लाख है.

मेदिनी की क्या है खासियत
इस नस्ल का मूल क्षेत्र झारखंड के पलामू, लातेहार और गढ़वा और आसपास के जिले हैं.

ये मध्यम आकार के मवेशी हैं, जिनका इस्तेमाल खींचने के काम के लिए किया जाता है.

कोट का रंग ज्यादातर ग्रे होता है. थूथन, पलकें, खुर और पूंछ का सिरा भी काला होता है.

माथा सपाट होता है और कान सीधे होते हैं. मेदिनी मवेशियों में कूबड़ कंधे के आगे होता है.

इनकी खासियत ये है कि चराई पर पाले जाते हैं. औसत दूध उत्पादन लगभग 1.6 किलोग्राम प्रति दिन है.

बैल जुताई के दौरान 7-8 घंटे काम कर सकते हैं। अनुमानित आबादी लगभग 14 लाख है.

रोहिलखंडी गाय की तस्वीर.

करण फ्राइज के बारे में जानें
इस मवेशी की नस्ल ICAR-NDRI द्वारा विकसित की गई है. मुख्य वितरण क्षेत्रों में हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, कैथल, जींद, यमुना नगर जिले शामिल हैं.

करण फ्राइज को होलस्टीन फ्राइज़ियन (HF) और थारपारकर नस्लों के क्रॉस ब्रीडिंग से
विकसित किया गया है और अब यह 62.5 फीसद HF और 37.5% थारपारकर वंशानुक्रम के साथ स्थिर हो गई है.

शरीर के कोट का रंग काला और सफेद होता है. कूबड़ नहीं होता है. गायें एक लैक्टेशन में 3550 किलोग्राम दूध देती हैं.

जिसमें 305 दिनों में 5851 किलोग्राम दूध देने की क्षमता होती है। दूध का अधिकतम उत्पादन 46.5 किलोग्राम है.

ये गर्म जलवायु वाली परिस्थितियों के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित है. इसकी अनुमानित आबादी लगभग 20 हजार है.

वृंदावनी में है क्या खास
वृंदावनी सिंथेटिक मवेशी ICAR-IVRI द्वारा विकसित किया गया है. ये उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं जिलों में वितरित गई है.

इसे 4 अलग-अलग मवेशी जर्मप्लाज्म के क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है. खून में 39.5 फीसद एचएफ, 26.9 फीसद हरियाणवी, 22 परसेंट जर्सी और 10.7 परसेंट ब्राउन स्विस का शामिल है.

जानवरों के कोट का रंग मुख्य रूप से भूरा होता है. सिर प्रमुख पोल और अवतल माथे के साथ, गोल किनारे वाले मध्यम आकार के कान होते हैं.

दूध का उत्पादन 3000 से 3500 किलो ग्राम, लैक्टेशन तक होता है. अनुमानित आबादी लगभग 10 हजार है.

Written by
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