Home मछली पालन Fish Farming Business : मछली तालाब के पास करें ये काम, बढ़ जाएगा कमाई का जरिया, बंपर होगी इनकम
मछली पालन

Fish Farming Business : मछली तालाब के पास करें ये काम, बढ़ जाएगा कमाई का जरिया, बंपर होगी इनकम

fish farming in pond
तालाब में मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन को कई और तरह से फायदेमंद बनाया जा सकता है. मसलन मछली पालन के साथ-साथ मुर्गी पालन, बत्तख पालन, और मछली के तालाब के आसपास खेती करके इसे ज्यादा मुनाफे वाला व्यवसाय बनाया जा सकता है. जबकि जलीय कृषि के साथ अन्य खेती और मुर्गी पालन से इन व्यवसाय को भी फायदा होता है. चूंकि देश में मछली पालन की ओर किसानों का रुख तेजी के साथ बढ़ रहा है तो यदि किसान इस तरह का तरीका अपनाएं कि अन्य खेती भी करें तो फायदा होना लाजिमी है. आईए जानते हैं कि मछली पालन के साथ कैसे इन खेती को कर सकते हैं और क्या होगा इसका फायदा होगा.

एक्सपर्ट कहते हैं कि तालाब के इर्द-गिर्द अगर केला, अमरूद, नींबू, सीताफल, अनानास, नारियल, सब्जियों में चुकंदर, करेला, लौकी, बैगन, बंद गोभी, फूलगोभी, खरबूजा, मटर, आलू और दलहन में हरा चना, काला चना, अरहर, राजमा, मटर, तिलहन में मूंगफली सरसों आदि फसल को लगाना चाहिए. यदि इन फसल को तालाब के चारों ओर तीन फीट चौड़ा ऊंचा बांध बनाकर लगाया जाए तो बेहतर होगा. वहीं ग्रास कार्प के भोजन के लिए चरी नेपियर घास की खेती भी तालाब के किनारे की जा सकती है. इससे ग्रास कॉर्प को भोजन मिल जाएगा.

खेत के लिए मिलती है खाद: एक्सपर्ट का कहना है कि तालाब से हासिल होने वाली गाद और जालीय पौधों को खाद के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. इस खाद को तालाब के किनारे के खेत में डालने से फायदा होता है. इसमें कोई खर्च भी नहीं आता है और फिर में खेत के लिए खाद मिल जाती है. वहीं इसकी खाद खेतों को ज्यादा उपजाऊ बनाने में बहुत सहायक होती है. एक्सपर्ट का मानना है कि इससे खाद्य पर आने वाला खर्च कम हो जाएगा और मछली पालन इस तरह से खेती के लिए भी फायदेमंद हो जाएगा.

मुर्गियों के वेस्ट का करें इस्तेमाल: मुर्गियों के वेस्ट को फिर से रिसाइकल करके खाद के रूप में उपयोग किया जाता है. बताते चलें कि एक मुर्गी के लिए 0.3 से 0.4 वर्ग मीटर की जगह की जरूरत होती है. 50 से 60 पक्षियों से 1 टन उर्वरक हासिल होता है. 500 600 पक्षियों से प्राप्त खाद को एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरह बिना खर्च के 4.5 से 5.0 टन मछली का उत्पादन किया जा सकता है. 700000 अंडे और 1250 किलोग्राम मुर्गी के मांस का उत्पादन होता है. इसमें किसी पूरक आहार अतिरिक्त उर्वरक की जरूरत नहीं होती है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

The State-wise number of coastal fishermen villages for development as Climate Resilient Coastal Fishermen Villages are envisaged in proportion to the total number of coastal fishermen villages in the State and at present
मछली पालन

Fisheries: पीएमएमएसवाई के तहत एक्वा पार्कों की स्थापना के लिए 713 करोड़ रुपए की मिली मंजूरी

नई दिल्ली. मत्स्य पालन विभाग (डीओएफ), मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय...

The States and UTs have been advised to implement the clusters based approach for development of fisheries and aquaculture. Based on the request received from the Andaman and Nicobar Administration, development of Tuna fisheries cluster in Andaman & Nicobar Islands has been notified under PMMSY.
मछली पालन

Fish Farming: सर​कार ने कहा ट्रॉलरों से पकड़ी जाने वाली मछलियों की मात्रा में नहीं आई है कोई कमी

नई दिल्ली. सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI) को 2021-25 के दौरान...