नई दिल्ली. मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत आने वाले मत्स्यपालन विभाग (डीओएफ) में केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रायगढ़ जिले में मछली पालन सहकारी क्लस्टर का दौरा किया और इसकी प्रगति की समीक्षा की. इसके अलावा उन्होंने सहकारी हितधारकों से सीधे संवाद भी किया. इस क्लस्टर को इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन विकास के एक मॉडल के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इस दौरे का उद्देश्य जमीनी स्तर की चुनौतियों का आंकलन करना और सहकारी नेतृत्व वाले दृष्टिकोण के जरिए मछली पालन-आधारित आजीविका को मजबूत करने के मौकों की पहचान करना था.
अपने इस अहम दौरे के वक्त डॉ. लिखी ने रायगढ़, महाराष्ट्र की 156 प्राथमिक मत्स्यपालन सहकारी समितियों और 9 मत्स्यपालक उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) का प्रतिनिधित्व करने वाले 251 सदस्यों से मुलाकात की.
मछली पालन क्लस्टर विकसित करने का क्या है मकसद
पीएमएमएसवाई के तहत अधिसूचित अन्य 34 क्लस्टरों की तरह, रायगढ़ में मछली सहकारी क्लस्टर को जलीय कृषि, समुद्री कृषि और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों को एकीकृत करके सामूहिक मत्स्य पालन-आधारित उद्यमों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया था.
इन 34 क्लस्टरों का व्यापक उद्देश्य पूरी मूल्य श्रृंखला में इंटीग्रेटेड विकास को प्रोत्साहन देकर एक अधिक प्रतिस्पर्धी, संगठित और सस्टेनेबल मछली पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देना है.
इन क्लस्टरों को विकास के इंजन के तौर पर देखा जाता है, जो बड़े पैमाने पर अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेंगे.
वहीं इस काम की वित्तीय स्थिरता और फायदे में सुधार करेंगे और उत्पादन और कटाई से लेकर प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और एक्सपोर्ट तक के पिछड़े और आगे के संबंधों को मजबूत करेंगे.
मछुआरों, मत्स्य कृषकों, सहकारी समितियों, एफएफपीओ, सेल्फ हेल्प ग्रुप, उद्यमों और स्टार्ट-अप को एक साथ लाकर, इन क्लस्टरों का उद्देश्य रोजगार निर्माण, आय में बढ़ोतरी और स्थायी आजीविका के मौके पैदा करना है.
इन्हें इनावेशन, उद्यमशीलता और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए भी तैयार किया गया है, जिससे भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को नीली अर्थव्यवस्था के एक जीवंत और लचीले स्तंभ में बदलने में तेजी आएगी.
पहचाने गए मछली पालन समूहों को मजबूत करने के लिए, मत्स्य पालन विभाग खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग मंत्रालय, नाबार्ड और एमएसएमई मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है.
इस सहयोग का उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना, वित्तीय पहुंच का विस्तार करना, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन देना और कुशल कार्यबल का निर्माण करना है.
जिससे उद्यमिता को बढ़ावा मिले, निवेश आकर्षित हो और मत्स्य पालन क्षेत्र में सतत विकास के लिए एक मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन मिले.










