Home पशुपालन Fodder: खेजड़ी-मोरिंगा चारा और दवा दोनों है, यहां पढ़ें इसके फायदे
पशुपालन

Fodder: खेजड़ी-मोरिंगा चारा और दवा दोनों है, यहां पढ़ें इसके फायदे

MORINGA TREE, MILK, GREEN FODDER, Moringa, Moringa cultivation, Moringa fodder, Drumstick crop, Drumstick cultivation, Moringa rates,
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCS HAU) में वानिकी विभाग द्वारा ‘मिट्टी से थाली तक’-खेजड़ी और सहजन (मोरिंगा) का पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. वानिकी विभाग द्वारा लगातार पोषण के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में यूनि​वर्सिटी के कुलपति प्रो. बी.आर. काम्बोज ने खेजड़ी और मोरिंगा की विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जो रिसर्च व प्रसारण के लिए प्रयोग किए जाएंगे. प्रो. बीआर काम्बोज ने अपने सम्बोधन में कहा कि पर्यावरण प्रदुषण का इंसानों के स्वास्थ्य पर नुकसान पड़ता है, इसलिए शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है.

खेजड़ी शुष्क क्षेत्र का बहुत महत्वपूर्ण वृक्ष है. इसका सम्पूर्ण भाग मनुष्य और पशुओं के लिए लाभदायक है. उन्होंने खेजड़ी के पोषकीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी कच्ची सांगरी में प्रोटीन औसतन 8 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट 58 प्रतिशत, फाइबर 28 प्रतिशत, वसा 2 प्रतिशत, कैल्शियम 0.4 प्रतिशत तथा आयरन 0.2 प्रतिशत पाया जाता है.

जानें क्या है इसमें गुण
इसी प्रकार पक्की फली में प्रोटीन 8-15 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट 40-50 प्रतिशत, फाइबर 9-21 प्रतिशत तथा शर्करा 8-15 प्रतिशत पाया जाता है.

कुलपति ने बताया कि थार शोभा खेजड़ी से प्राप्त सांगरी आय का एक मुख्य स्त्रोत है. कच्ची फलियां, ताजी व सूखी हुई दोनों अवस्थाओं में उपयोग में ली जाती हैं.

सांगरी से आचार भी बनता है जो लम्बे समय तक उपयोग में लिया जा सकता है. इसकी पकी हुई सूखी फली का पाउडर बनाया जा सकता है, जिससे बिस्कुट जैसे बेकरी आइटम तैयार की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि मोरिंगा का प्रत्येक भाग पोषण के लिए उपयोगी है. इसकी पत्तियां खनिज तत्वों, विटामिनों और अन्य आवश्यक फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं.

दवाओं के मद्देनजर मोरिंगा अनेक गुणों से युक्त है. यह एक मजबूत एंटीऑक्सीडेंट, कैंसररोधी, मधुमेहरोधी और रोगाणुरोधी एजेंट के रूप में कार्य करता है.

इन विशेषताओं के कारण मोरिंगा को सही मायनों में चमत्कारी वृक्ष कहा जाता है. इसकी पत्तियां मुख्य रूप से कैल्शियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, आयरन और विटामिन ए,डी,सी से भरपूर होती हैं.

वानिकी विभागाध्यक्ष अध्यक्ष डॉ. संदीप आर्य ने बताया कि वानिकी विभाग ने विभिन्न कृषि वानिकी मॉडलों पर परीक्षण किए हैं, जिसमें पाया गया कि खेजड़ी के साथ जो फसल बोई जाती है उस फसल की उत्पादकता सामान्य से अधिक होती है.

यह मिट्टी की उर्वरता क्षमता को बढ़ाता है. इस वृक्ष की फलियां स्थानीय रूप से सांगरी के रूप में जानी जाती हैं, जिसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा मे होते हैं.

इस अवसर पर कुलसचिव सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी, विभागाध्यक्ष सहित शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारियों व विद्यार्थियों ने भी पौधरोपण किया.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालन

Pashu Mela: गडवासु में 20 और 21 मार्च को लगेगा ‘पशुपालन मेला’, किसानों को मिलेगा मुख्यमंत्री पुरस्कार

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना 20...

पशुपालन

Animal Husbandry: डेयरी बिजनेस से हो रहा है गांवों का विकास, किसानों की सुधर रही आर्थिक स्थिति

नई ​दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के...