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Fisheries: मछली के बच्चों को तालाब में छोड़ते समय इन बातों का रखें ध्यान

मछली के तालाब में चूना पोषक तत्व होता है, ये कैल्शियम उपलब्ध कराने के साथ जल की अम्लीयता को कंट्रोल करता है.
मछली का तालाब.

नई दिल्ली. मछली पालन में हर स्टेप पर बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है. खासतौर पर तब जब मछली के बीज को तालाब में छोड़ना है. जब बात आती है मछली के बीज या बच्चों को तालाब में छोड़ने की तो इस वक्त मछली पालकों से सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है. भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग के मुताबिक अक्सर मछली पालक जल्दबाजी में सीधे बोरी या प्लास्टिक बैग से मछली के बीज को तालाब में फेंक देते हैं. जबकि यहीं उनसे एक गलती हो जाती है और मछली पालन की पूरी कोशिश बेकार जा सकती है.

एक्सपर्ट का कहना है कि जब भी मछली के बीज को लाएं तो पॉलिथीन बैग को बिना खोले ही तालाब के पानी में 15 से 20 मिनट तक रहने दें. इससे इस बैक का तापमान तालाब के तापमान के बराबर हो जाएगा, जिससे बच्चों को टेंपरेचर शॉक नहीं लगेगा.

क्या है सही तरीका
एक्सपर्ट का कहना है कि इसके बाद बच्चों को धीरे-धीरे तालाब में खुद से निकलने दें. या फिर अपने हाथ से उन्हें छोड़ सकते हैं.

यदि आप पंगेशियस जैसी मछलियों के बच्चों को तालाब में डालना चाह रहे हैं तो एक और जरूरी स्टेप कभी ध्यान रखना चाहिए.

पंगेशियस मछली के बीज को तालाब में डालते समय पोटेशियम परमैंगनेट यानी लाल दवा का हल्का सा छिड़काव जरूर करें.

एक्सपर्ट का कहना है कि यह दवा मछलियों को एक दूसरे के कांटे से होने वाले जख्मों से बचाती है और उनके जख्म जल्दी भरने में मदद करती है.

इससे मछलियों में मृत्यु दर बेहद ही कम हो जाती है और मछली के बीज का सर्वाइवल रेट बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.

निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो मछली पालन में अच्छा रिजल्ट हासिल कर सकते हैं. इसका मतलब यह है कि आप जल्दबाजी न करें. ध्यान से मछली के बच्चों को तालाब में डालें और मछली पालन में अच्छी कमाई करें.

Written by
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