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Fish Production: बिहार के सारण में 12 हजार टन मछली का हुआ उत्पादन, जिले में है 646 तालाब

1.2 million fisher households nationwide bringing in real-time validation.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. बिहार में मछली उत्पादन बढ़ रहा है और इससे लोगों को फायदा भी हो रहा है. वहीं बिहार का सारण जिला भी मछली उत्पादन के क्षेत्र में हर साल नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. बेहतर मुनाफे और सरकारी प्रोत्साहन के कारण बड़ी संख्या में युवा और किसान इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं. पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की योजनाओं ने इसे जिले के लिए आर्थिक मजबूती का एक मजबूत जरिया बना दिया है. विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य से अधिक उत्पादन की उम्मीद जतायी है. जिला मत्स्य विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए 19.77 हजार टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 25 दिसंबर 2025 तक लगभग 12 हजार टन उत्पादन हो चुका हो चुका है. वहीं विभाग को उम्मीद है कि 31 मार्च तक यह आंकड़ा 20 हजार टन के पार पहुंच जायेगा. गौरतलब हो कि जिले में 98 सरकारी तालाब है, जबकि 548 निजी तालाबों में व्यावसायिक स्तर पर मछली पालन हो रहा है.

मिल रहा है लोगों को रोजगार
जिले के मछली पालकों और किसानों को उन्नत तकनीक से मछली पालन के लिए समय-समय पर अन्य जिलों और राज्यों का भ्रमण कराया जाता है.

हाल ही में एक दिवसीय भ्रमण दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत मत्स्य से जुड़े 50 लोगों का समूह सिवान गया था.

जहां उन्होंने उन्नत मत्स्य पालन, मछलियों में होने वाली बीमारियों एवं उनके निदान, बायोफ्लॉक तकनीक, मिश्रित मछली पालन और मत्स्य बीज हैचरी से संबंधित जानकारी हासिल की थी.

जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि सरकार की तरफ से मछली पालन की योजना चल रही है.

लोग इससे संबंधित किसी प्रकार की जानकारी विभाग में आकर हासिल कर सकते हैं.
मछली पालन की ट्रेनिंग भी दी जाती है.

बहुत से मछली पालकों का कहना है कि हम ये सोच रहे थे कि कौन बिजनेस करें, लेकिन सरकार की योजना ने रस्ता दिखाया और आज ये बिजनेस चल पड़ा है.

उन्होंने बताया कि मछली व्यवसाय इस समय सबसे बेहतर व्यवसाय है. कम लागत और अनुदान के साथ यह शानदार बिजनेस है.

वहीं मछली पालन रोजगार का सबसे अच्छा साधन बन गया है. मछली पालन और मछली व्यवसाय से लोगों को रोजगार मिल रहा है.

निष्कर्ष
अफसरों का कहना है कि मछली पालन से लोगों को ज्यादा फायदा से रहा है. सबसे बड़ी बात है कि इसमें सरकारी अनुदान और सहयोग भी मिल रहा है. इससे किसान जुड़ रहे हैं.

Written by
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